दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

जमाना

कविता

सदानंद गाजीपुरी

12/14/20251 min read

जमाना.

जमाना भईल जाता बाउर

अंजुरी प छाटांत बा चाउर

तिलक बरईछा में मांग बा मीट, दारू

फेल बा पुआ, पकवान आ जाउर

जानवर, पंछी सब दहशत मे जीयत बा

केतना कठोर होत जाता करेजा अब राउर

मोह, दया पर बर्फ जम गोइल बा

एह गर्दिश में कईसे होई करेज़ा दनाऊर

पहिले पुअरा, डांठ पर नीद सुकून रहे

टेंशन में कांटा लागे बेड, सोफा गोनाउर

बहिन, बेटी क हिस्सा खा सोशल मीडिया

बंद भइल मोटरी, गठरी, पकवान, पाहूर

गेस, लमटेन, दिया बाती, हेरा गोइल

बिजुली से बढ़ता गर्मी, देहिया भइल खटाउर

पेड़ के छाया नईखे अब शहर में

आरी, टांगा भईल जाता ढीठाउर

पढ़े के एज में सब बिजी बा रील में

छने - छने युवा पीढ़ी भईल जाता पीटाउर

सदानंद गाजीपुरी

गाजीपुरी

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जय भोजपुरी, जय भोजपुरिया

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