दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

हमरा के नइख चिन्हत

लघु कथा

राजेश भोजपुरिया

7/29/20251 min read

  1. हमरा के नइख चिन्हत

रमेशर के अपना इलाका में बड़ी शोर रहे । आ रहो काहे ना उ अपने कहत फिरत रहन कि हमरे नाम रमेशर ह । हमराके के नइखे चिन्हत ! सब कोई चिन्हत बा, हमार काम कबो ना रुके ! जिला-जवार में हमार नाम बा । जहाँ चल जाइना ओहिजे लोग चाय-पानी खातिर बइठावे लागेला ! मोहल्ला में कुछ लोगन से परिचय रहे उनकर बाकिर अइसन ना रहे कि पूरा इलाका उनका के चिन्हत होखे ।

कवनो बात के लेके रमेशर मीन-मेख निकाले में आगे रहस । बतकुच्चन में उनकर जोर ना रहे । केहू के लजवावे वाला काम भी दस आदमी के बीच में कर देत रहन । इनका एह करनी पर कुछ लोग खूब थपड़ी पिटत रहे त कुछ लोग इनका से दूरी भी बना लेत रहे । अपना बड़बोलापन से ई कुछ लोगन के प्रिय भी रहन बाकिर जेकरा बारे में बोल के लजवावे के काम करस उ रमेशर के खिलाफ हो जाय । बात अइसन करस कि लागे जइसे सब कुछ इनके जानकारी होखे । लागत रहे कि सब बड़का लोगन से इनकर परिचय बा ।

कुछ दिन असही बीतल रमेशर बीमार चले लगले । बीमारी के वजह रहे उनकर उल्टा-पुल्टा खाइल, जहे जास ओहिजे जवन मिले खाये से ना मानस । बीमारी शरीर मे अइसन घर कइलस कि घर के लोग भी परेशान । दवा-दारू चले लागल, कई गो डाक्टर के देखावल गइल बाकिर बीमारी बढ़त गइल । रमेशर के सारा शरीर के चेकअप भइल त रोग के पाता लागल बाकिर बहुत देर हो गइल रहे । रमेशर शरीर से बहुत कमजोर हो गइल रहलन । डाक्टर खान-पान पर बहुत परहेज करे के कह देले रहे आ साथे-साथ दवा भी चले लागल । घर परिवार के लोग रमेशर के अपना से बहुत देख-भाल करे लागल । छव महीना दवा चलला के बाद रमेशर के तबियत पहिले से ठीक हो गइल । ज्यादातर उ घरही में समय बितावे लगले । उनकर जेतना शुभचिंतक लोग रहे उनका से आके भेंट मुलाकात करे आ रमेशर पहिले के तरह उ सब से बतकुच्चन करस ।

एक बेर हम आ हमार मित्र कमेशर के बात भइल कि चलल जाय रमेशर से भेंट करे । कमेशर कहले कि रमेशर त पूरा तरह से ठीक हो गइल बाड़न पहिले जइसन !

हम कहनी की ओसे का ढेर दिन हो गइल भेंट कइला चलल जाव मिल के आइल जाई । जाड़ा के दिन रहे कमेशर कहले कि भाई उनकरे इलाका में लइकवा के स्कूल के स्वेटर बनवावे खातिर दिहल बा, चलल जाय रमेशर से भेंट भी क लियाई आ स्वेटरवा भी लेले आवल जाई । हमनी दूनू आदमी पहुँचनी जा रमेशर के घर पर, आवाज दिहल गइल - रमेशर भाई !

ओने से रमेशर निकलत कहले के ह ?

"आरे भाई तू लोग । आव-आव जा बईठ । कहजा हाल समाचार ।"

हमनी कहनी जा कि तोहरे से मिले आइल रही जा । अब तबियत ठीक बा नू..! रमेशर कहले, "ह पहिले से ठीक बा, दवा चल रहल बा ।"

कुछ देर बात-चीत भइल । फेर चाय-पानी पीके हमनी कहनी जा कि रमेशर भाई चलत बानी जा, एहिजे बगल से कमेशर के लइका के स्वेटर लेवे के बा बनवावे खातिर दिहल रहे । तब ले कमेशर कहले कि स्वेटरवा वाला पुरजा त घरही छूट गइल स्वेटर कइसे मिली बिना पुरजा के ? ई सुन के रमेशर कहले कि हमरे नाम रमेशर ह ! कवना दोकान में दिहल बा बनवावे खातिर ? हम साथे चलत बानी, हमरा के सउसे इलाका चिन्हेला । हम कहनी की ठीक बा चलल जाय । तीनो आदमी चल देनी जा दोकान के ओरी । दोकान पर पहुँच के कमेशर कहले कि लइका के स्वेटर देले रहनी ह, बनवावे खातिर बन गइल बा का ? दोकानदार कहलस कि पुरजा भा स्कूल के डायरी देखाई ।

कमेशर कहले - पुरजा त नइखी लाइल ।

तब ले रमेशर आगे अइले आ दोकानदार से कहले कि हमरा के नइख चिन्हत ।हमरे नाम रमेशर ह !

दोकानदार रमेशर के ऊपर से नीचे देखलस आ कहलस कि ना हम तोहरा के नइखी जानत । आ जब ले पुरजा लेके ना अइब स्वेटर ना मिली । मुँह लटकइले दोकान से बहरी आवे के पड़ल । एह से की रमेशर के केहू चिन्हते-जानत ना रहे । हम कमेशर से कहनी, "चल रे भाई । पुरजा लेके अईहे आ स्वेटर ले जइहे । एह बतकुच्चन करे वाला के फेरा में कहा पड़ गइनी जा ।

  1. ट्रांसफार्मर ना लागी

टोला-मोहल्ला में बिजली के समस्या हो गइल रहे । रात-रात भर बिजली कटल रहे, गरमी के मारे लोगन के बुरा हाल रहे । एही मोहल्ला में गौरी नेता रहत रहले । बहुत सक्रिय नेता रहले । बिजली के आँख मिचौनी से परेशान उहाँ के लोग गौरी नेता भीरी गइल आ कहलस , "ई बिजली के आँख मिचौनी कब ले चली ? कब तक नाया ट्रांसफार्मर खातिर मोहल्ला के लोग राह निहारी ?"

ओही लोगन में नेता जी के एगो खास चेला रहे गंजू । गंजू नेता जी के कहलस, "आज सभे केहू के लेके चलल जाय विद्युत अभियंता भीरी ।"

गौरी नेता भी आव देखले ना ताव आ सभे लोगन से कहले कि हमरे रहते मोहल्ला में बिजली के समस्या रही ? आज बिजली विभाग के घेराव कइल जाव नाया ट्रांसफार्मर खातिर । हमरा रहते ट्रांसफार्मर ना लागी ? आज लेके रहेकेबा ।

नेता जी भूमिका बनावत सभे लोगन के लेके चलले बिजली विभाग के ऑफिस आ रास्ता में कहते रहले कि देखिह लोग आज ट्रांसफार्मर कइसे लेके रहब ।

बिजली विभाग पहुँच के गौरी नेता लोगन से कहले कि तू लोग एहिजे बहरी इंतजार कर हम विद्युत अभियंता के ऑफिस में भीतर जात बानी आज नाया ट्रांसफार्मर लेके रहे के बा । नेता जी अंदर गइले । ढेर देरी भइल त उनकर चेलवा गंजू सोचलस कि हेतना देरी काहे होता ? नेता जी भीतरी का कर ताड़े तनी लुका के खिड़की से देखल जाय ।

चेलवा देखलस कि नेता जी बिजली अभियंता के गोड़ पकड़ के बइठल बाड़े आ रिगिर कइले बाड़े कि माई-बाप हमार इज्जत के सवाल बा नाया ट्रांसफार्मर मोहल्ला खातिर पास करा दी ना त साथ आइल मोहल्ला के लोग हमरा के ना छोड़ी । ढेर देरी तक गोड़ पकड़ला के चलते बिजली अभियंता कहले कि ठीक बा तोहरा मोहल्ला खातिर हम नाया ट्रांसफार्मर बुक करत बानी । अतना कहते भइल की नेता जी गोड़ पर से उठले आ बहरी आके लोगन से कहले कि, "हमरा रहते मोहल्ला में नाया ट्रांसफार्मर ना लागी ? चल लोग ट्रांसफार्मर बुक हो गइल जल्दिये लाग जाई ।"

बाकिर ट्रांसफार्मर कइसे मिलल ? नेता जी के सब खिलकट उनकर चेला गंजू देख लेले रहे । गंजू कहलस, "जय हो नेता जी, ट्रांसफार्मर दिवा देनी ।"

राजेश भोजपुरिया

जमशेदपुर, झारखंड

राष्ट्रीय संयोजक, भोजपुरी जन जागरण अभियान