दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
तार भइली जिनगी
गीत
बृजमोहन प्रसाद अनारी
3/15/20261 min read


तार भइली जिनगी
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नदिया के गिरतऽ,आरार भइली जिनगी ,
टुटल वीणा के तार भइली जिनगी ----------टेक।
धुरि में निखहरे,लइकन के सुतवली,
लइकन के माई लेवा पातरे ओढ़वली,
तबो जंतइले अइसन भार भइली जिनगी ----------टेक।
तीन दिन के सुख नाहीं कहले कहालाऽ,
ओइसे डगराला जइसे सरसो छिटालाऽ,
मउवति के ऊपर सवार भइली जिनगी ----------टेक।
नाइ जइसे परेले,चकोह के भंवर में,
ओही तरे सोचे लगली दुरदिन के घर में,
बिना माझी के पतवार भइली जिनगी ----------टेक।
राती खा चान दिने सुरूज के रखवारी,
सगं दिहलसि भूखि,बेमारी आ लाचारी,
सपना के संपति बेकार भइली जिनगी ----------टेक।
बृजमोहन प्रसाद अनारी
9450953545
