दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

महजान के सूद

ग़ज़ल

निर्मल चौधरी

7/28/20251 min read

ग़ज़ल

महजान के सूद के, सामान हो गईल

भीरवा की बिटिया जवान हो गईल ।

करजा से सोहर, करजे से सराध होखे,

ई बंधुआ रहे के बिधान हो गईल

घड़ी घड़ी आवत रहे, हाल चाल पूछे,

भोट जबसे देनी उ त चान हो गईल

जवन चाहीं तवन ल, रूपया अगर होखे,

देस अब बनिया के दोकान हो गईल

कउवा सियार के बहार आ गईल,

मंच जबसे देस के मचान हो गईल ।

ई ह आजादी, त गुलामी रहे नीक,

सहीदवन के खून त जियान हो गईल

निर्मल चौधरी

रिटायर जुट मजदूर

सम्पादक - मजदूर, मासिक पत्रिका परमेश्वरी

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