दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
स्मृतिशेष : गंगा प्रसाद अरुण
स्मृतिशेष
राजेश भोजपुरिया
3/15/20261 min read


स्मृतिशेष : गंगा प्रसाद अरुण
कवि, गीतकार व साहित्यकार श्री गंगा प्रसाद अरुण के जन्म 4 जनवरी 1947 के ग्राम पड़रिया, पोस्ट- बुढ़वल, थाना - काराकाट, जिला रोहतास, बिहार में भइल रहे ।
पढ़ाई लिखाई बुढ़वल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से उच्चतर माध्यमिक 1965 में, करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से स्नातक हिन्दी प्रतिष्ठा 1971 में ( राँची विश्वविद्यालय में प्रथम श्रेणी में द्वितीय स्थान ) भइल ।
आजीविका :- टाटा मोटर्स, जमशेदपुर से प्रबंधक ( शिक्षा आ सामुदायिक सेवाएं ) पद से 4 जनवरी 2007 में सेवानिवृत्त भइल रही ।
साहित्य सेवा :- भोजपुरी / हिन्दी में इहां के कलम खूब चलत रहे ।
गंगा प्रसाद अरुण जी के साहित्य विधा गीत, नवगीत, गजल, हाइकु, मनगीत के अलावा छंद - बद्ध, छंद मुक्त काव्य रचना आ ललित गद्य रहे ।
इहां के अब तक के प्रकाशित किताबन में :-
- हहरत हियरा, भोजपुरी गीत संग्रह -1974,
- तिरती सी परछाइयाँ, हिन्दी गीत - नवगीत संग्रह - 2002,
- अंगना महुआ झरल, भोजपुरी गीत - नवगीत संग्रह - 2010
- तीन डेगे त्रिलोक, भोजपुरी हाइकु / हाइकु गीत संग्रह - 2013,
- गजल गवाह बनी ( भोजपुरी हस्तलिखित गजल संग्रह - 2018 )
- प्रेम न बाड़ी ऊपजै ( भोजपुरी मदन लेख - 2020 )
- मनुवां मनगीत लिखे ( भोजपुरी मनगीत - 2021 )
- द्वंद्व समास ( भोजपुरी ललित गद्य - 2021 ) प्रमुख बाड़ी सन ।
इहां के प्रकाशन खातिर कुछ संग्रह तइयार बाड़ी सन । अरुण जी कई गो किताब आ पत्रिकन के सम्पादन - सम्पादन सहयोग कईले रही, जवना में :-
पत्रिका :- लकीर, लुकार, विकास वार्ता, पर्यावरण चिंतन, रचनाकार, लुकार ( स्वर्ण जयंती अंक ), इस्पातिका ( स्मारिका ), माई के बोली ( स्मारिका ), विदूषक, पारिजात कल्प, मानवी, निर्भीक संदेश, इस्पात भारती इत्यादि ।
पुस्तक :- हरिशंकर वर्मा स्मृति ग्रन्थ, निर्भीक अभिनन्दन ग्रन्थ, अगुआ ( लघुकथा संग्रह ), बिना के तान, सुपुली भर तरेगन, डॉ परमेश्वर दूबे शाहाबादी के शोध ग्रन्थ आ नवगीत संकलन 'फूल हरसिंगार के' के संपादन प्रमुख बा ।
अरुण जी के रचना - प्रसारण, प्रकाशित आ प्रस्तुति :-
आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रन से, दूरदर्शन पर, झारखण्ड, बिहार, पशिचम बंगाल, उत्तरप्रदेश, ओड़िसा के विभिन्न काव्य मंचन से अपना रचना के सस्वर प्रस्तुति ।
स्थानीय पत्र पत्रिकन के अतिरिक्त सुरसती / प्रत्याभिता ( सासाराम ), परास ( तेनुघाट ),
सम्मेलन पत्रिका ( पटना ), पाती ( बलिया ), समकालीन भोजपुरी साहित्य ( देवरिया ), कविता ( पटना ), खोइछा ( आरा ), भोजपुरी माटी ( कोलकाता ), बिगुल ( सारण ), भोजपुरी जिनगी ( दिल्ली ), समग्र दृष्टि ( पुणे ), संकल्प सौरभ ( राउरकेला, ओड़िसा ), बेला ( मुजफ्फरपुर ), उत्तर ( मुजफ्फरपुर ), पहचान ( डेहरी आन सोन, रोहतास ) के अलावा कई गो पत्र पत्रिकन में रचना प्रकाशित होत रहे ।
स्थानीय दैनिक अखबारन, हिन्दुस्तान, प्रभात खबर, जागरण, उदितवाणी, दैनिक भास्कर, चमकता आईना, न्यू इस्पात मेल, आज इत्यादि में शताधिक ललित गद्य - पद्य रचना प्रकाशित होत रहल बा ।
इहां के हाथे कई गो अभिनंदन पत्र लिखाईल रहे, जवन बहुत साहित्यकार लोगन के घर के दीवार पर आजो शुशोभित होई ।
कई गो पुस्तक पत्रिकन के आवरण चित्रण भी डिजाइन कइले रही - जइसे ( लुकार, लकीर, विकासवार्ता, शाहाबादी रचनावली, पत्रावली : दिवंगत भोजपुरी सेविन के, हहरत हियरा, लकीर : कहानी संग्रह, पारिजात कल्प, मानवी, पर्यावरण चिंतन, स्टील सिटी समाचार, भोर ( मगही ), भोजपुरी लोक धारा, निर्भीक संदेश, रचनाकार, छितराइल फूल, तीन डेगे त्रिलोक इत्यादि ।
इहा के कई गो सम्मान से सम्मानित भी भइल रहीं, जवना में प्रमुख बा :-
- आचार्य महेंद्र शास्त्री पुरस्कार ( अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन द्वारा गीत नवगीत संग्रह अंगना महुआ झरल खातिर )
- साहित्य सेवा सम्मान ( जन कल्याण समिति, जमशेदपुर - 1997 )
- साहित्य सम्मान (इस्पात भारती, जमशेदपुर - 2006 / 2015 )
- भिखारी ठाकुर सम्मान ( अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, सासाराम - 2006 ),
- भोजपुरी सेवा सम्मान ( विश्व भोजपुरी सम्मेलन, देवरिया /जमशेदपुर - 2009 ),
- भोजपुरी सेवी सम्मान ( अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, रायपुर - 2009 ),
- भिखारी ठाकुर सम्मान ( कुतुबपुर / आरा - 2011 ),
- डॉ प्रभुनाथ सिंह सम्मान ( विश्व भोजपुरी सम्मेलन, दिल्ली - 2011 / 2012 ),
- सरदार वल्लभ भाई पटेल सम्मान ( श्रीकृष्ण सिन्हा संस्थान, जमशेदपुर - 2013 ),
- भोजपुरी सेवा सम्मान ( अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी महोत्सव, जमशेदपुर - 2015 )
- भोजपुरी सेवा सम्मान ( प्रान्तीय भोजपुरी सम्मेलन, बोकारो - 2016 )
- साहित्य शिरोमणि सम्मान ( संकल्प संस्थान, राउरकेला - 2016 )
- साहित्य सेवा सम्मान ( लायन्स क्लब, जमशेदपुर - 2016 )
- भोजपुरी सेवी सम्मान ( लहरिया, भारती मीडिया एन्ड इंटरटेनमेंट, जमशेदपुर - 2016 ),
- डॉ प्रभुनाथ सिंह सम्मान, विश्व भोजपुरी सम्मेलन, दिल्ली - 2018,
- पाती अक्षर सम्मान , बलिया - 2018 / 19,
- प्रथम एकादश के लोकार्पण के अवसर पर सम्मान स्वरूप प्रतीक चिन्ह,
- अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के 27वां अधिवेशन 2023 जमशेदपुर में भोजपुरी सेवा खातिर सर्वतोभावेन माधव सिंह सम्मान । एकरा अलावा कई गो मंचन से सम्मानित भइल रहीं ।
अपना सम्पादन में लगातार भोजपुरी के अनियतकालीन पत्रिका 'लकीर' के नया आयाम देत रहीं । भोजपुरी के समर्पित पत्रिका "लकीर" के अब तक ले दस गो अंक निकल चुकल । साल 2023 में लकीर के दसवां अंक प्रकाशित भइल रहे । बहुत जल्दिये लकीर के अगिला अंक रउआ सभे के सोझा होई उम्मीद बा ।
बितल साल 2025 के 15 अगस्त के दिन इहा के निधन परिवार आ भोजपुरिया समाज खातिर असहनीय पीड़ादायक रहे । बाबूजी स्मृति में हरमेश बनल रहब ।
दीया बाती परिवार अपना प्रिय साहित्यकार के बेर - बेर नमन कर रहल बा ।
राजेश भोजपुरिया
