दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

चलत गाड़ी राम भरोसे

व्यंग्य

सुनील कुमार यादव

8/1/20251 min read

चलत गाड़ी राम भरोसे

परानपुर गांव । हमार गांव । जिला त बलिया ह, बाकी बा एकदम कोनासी में । ऐतना कोना - अंतरा में बा कि ओकरा के दीया बाती ले के खोजे के परेला । ई बात एह से कहतानी कि भारत सरकार के कवनो योजना हमरा गांवे चहुंपत चहुंपत दांत चियार देला । हमरा गांव में कवनो चिट्टी पतरी भेजे के होला त जिला बलिया ना लिखाला, बलुक जिला बक्सर लिखाला । बलिया लिख देब त बड़ेरा अस ऊ चिट्ठी बउड़ियात रहि जाई । कइसो कइसो त पछिला साल बिहार से बिजली के तार खींच के बिजली हमरा गांव में पहुंचावल गइल ह, ना त गांव में अइसन बुझात रहल ह कि जिनिगी अन्हरिए में बीती ।

गांव के लइका पढ़ि लिखि मत जा स एह से सरकारी स्कूल खाली नामे के बा । टूटल, भंसल स्कूल में भी लइका सब मेहनत क के खूब आगे बढ़लन । बाकी प्रधान जी भा शिक्षा विभाग केहू आजु ले कुछ खास काम ना कईल । गांव वाला के केतना कहला प अबकी बेर प्रधान जी शिक्षा विभाग के एगो चिट्टी लिखलन कि स्कूल के देवाल गिर गईलबा, ओकरा के ठीक करवा दिहल जाव ।

केतना चिरउरी प स्कूल के बाउंड्री खातिर 2 लाख मिलल । बाकी शिक्षा विभाग अहसान कइले रहे त ओकर कमीसन बनबे करी । त, विभाग आपन 40 हजार कमीसन काट लिहलस आ 1.60 लाख भेज दिहलस । अब डीपीओ साहब काहें खातिर पाछा रहसु । उहो त फइलिया प साइन क के अहसान कइले रहलन, त उनको कमीसन भइबे कइल । उहों के आपन मेहनताना 30 हजार ड्राइवर के खाता में मंगवा लिहनी । ई कुल ममिला में हमनी के मुखिया जी नीमन हई। उहां के कमीसन ना मांगेनी । उहां के सीधे अपना खाता में कमीसनवे भेज लेनी । त उहों के 10 हजार के मलाई चाभि लिहनी । ठेकेदार साहब बिना रंगदारी दिहले काम कइसे करा लिहें । त गाँव के रंगदारन के जइसही खबर लागल कि कुछ काम होखे वाला बा त आपन हक हिसा खातिर ठेकेदार साहब के दुआर प चढ़ि के, प्रेम से फफेलिया के 50 हजार के नेग नेवता के वसूली क लिअउवे लो ।

बचल 70 हजार । माट साहब ईमानदार आदमी रहनी । उहां के सबसे सस्ता ईंटा मंगववनी । अभी काम के सीताराम होखही के रहे तले केनियो से कुछ क्रान्तिकारी फेसबुकिया, माइकधारी पत्रकार साहब आ गइल लो । क्रान्ति के कीरा कुलबुलाए लगुए त दूं चार गो ईंटा तुरुवेलो आ चिकर चिकर के वीडियो बनावे लगुवे लो । देखिए ! देखिए ! सरकारी पैसों का दुरुपयोग ! तीन नंबर का ईंट देखिए, माट साहब का भ्रष्टाचार ।

लांगा से गंगा जी भी दूरे रहेली । माट साब त बहुत बढ़िया आदमी रहनी एह से खाली रूपया 5 हजार में ही सौदा तय क दिहनी । 'अब वीडियो ना डालल जाई ।'

देवाल केहू तरे बन गइल । लइका खूब खुस भइलन । उनका का मालूम रहे कि ई देवाल ना ह, कब्र के नेव ह । एक दिन खेलत लइकन प उ देवाल गिर गइल ।

सुनील कुमार यादव

प्रबंध संपादक - दीया बाती भोजपुरी, मासिक, ई - पत्रिका

प्रबंधक - फीनिक्स इंटरनेशनल स्कूल निमिया पोखरा - भगवानपुर, बलिया

सचल दूरभाष - 9839159190