दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

संसार के बाजार में

कविता

रिशु कुमार गुप्ता

12/14/20251 min read

संसार के बाजार में

ए मनई का का बेचाता ?

सांच बेचाता झूठ बेचाता

पाखंड में पड़ि के जूठ बेचाता,

कौड़ी भावे काम बेचाता

नींद चैन आराम बेचाता

मान शान सम्मान बेचाता

थोड़़ की में इमान बेचाता

इज्जत आबरु सब बेचाता

धरम जात मजहब बेचाता

कंठ बेचाता आवाज बेचाता

दिल अउरी दिमाग बेचाता

मजबूरी लाचारी बेचाता

केहू के होशियारी बेचाता

प्यार मोहब्बत जज्बात बेचाता

संयम, क्षमता औकात बेचाता

देखऽ नोट प भोट बेचाता

आदमी गोटे गोट बेचाता

सुबह शाम दुपहर बेचाता

खुलेआम जहर बेचाता

परिवार संगे मकान बेचाता

दुआर खेत खरिहान बेचाता

सुनऽ मनई रिशु के कहनाम

तेरह के भाव में जान बेचाता ।

रिशु कुमार गुप्ता

कसियां, डुमरांव, बक्सर

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