दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
संपादकीय
संपादकीय के बहाने
डॉ. राजेन्द्र भारती
2/14/20261 min read
संपादकीय के बहाने...
भोजपुरी के विकास खातिर ई जरूरी बा कि भोजपुरी में जिए - मरे वाला रचनाधर्मी तनी सचेत होखो । पत्रिकन के काम बा स्तरीय रचना के पाठक तक पहुंचावल ।
रचना अइसन होखो जेहके साहित्य के श्रेणी में राखल जाव, कवनो भाषा के साहित्य से वजन में कम ना होखे ।
काहें से कि अभी भोजपुरी में क्षेत्रियता के चलते कुछ छूट बा, कवनो मानक नइखे । कहीं 'बा', कहीं 'बाटे', कहीं 'आ' कहीं 'भा', एह तरीका के बहुतेरे उपयोग होत बा ।
भोजपुरी के समृद्ध करे के जिम्मेदारी लिखनिहार प बा । सजग होखला के काम बा । काहें से कि स्तरीय रचना के अभाव में अंक निकाले में देरी होता, समय से अंक नइखे आ पावत ।
भोजपुरी के ऊंचाई देवे खातिर हर विधा प ध्यान दिहल जरूरी बा ।
आशा बा रउवां भविष्य में प्रत्येक मौसम, व्रत, त्यौहार के ध्यान में राख के दीया बाती के व्हाट्सएप नंबर 9839159190 प रचना भेजत रहब ।
एह अंक के मुख्य पृष्ठ मशहूर साहित्यकार, चित्रकार पारुल तोमर जी के रचना ह । पारुल तोमर जी के दीया बाती परिवार की ओर से बहुत बहुत धन्यवाद आ आभार ।
नवका साल सबके सुख, समृद्धि देवो ईहे कामना बा ।
डॉ. राजेन्द्र भारती
