दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
साँप
गजल
डॉ. रामरक्षा मिश्र 'विमल'
12/20/20251 min read


गजल
साँप
पत्थरन से दिल लगावल कबहुँओ ना नीक ह
साँप से भी ओइसहीं दूरी बनावल ठीक ह
काम आई ना कबो अनका के ताकत फ्रंट पर
रार बेसाहल बड़न से छोड़ि दीहल नीक ह।
तर कइल गरमी में आपन घर त नीमन हइए ह
आगि दोसरो के बुतावल मनुजता के लीक ह
क्रांति जब होई जरूरी हम मिलबि आगे सदा
बेवजह दिल के दुखावल कइसहूँ ना ठीक ह
का पता कब के कहाँ दे दी पटकनी जोर से
हर बखत अङुरी करेवाली रहन ना नीक ह
ए तरे सोगहग विमल तहरा कबहुँओ ना मिली
हर घरी अपनो के धूँसल ना निमनका लीक ह
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डॉ. रामरक्षा मिश्र 'विमल '
निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, पिपरा
देवनगर, पोल नं. 28, पिपरा रोड,
पो. - मनोहरपुर कछुआरा
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ई मेल : rmishravimal@gmail.com
