दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

कण - कण में राम जन - जन में राम

कविता

शशिलता पाण्डेय 'सुभाषिनी'

12/19/20251 min read

कण - कण में राम जन - जन में राम

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अब बाजल बधाई घर - घर मे लवट के श्रीराम अइहे,

रावण वध कइके लवट राज भवन अयोध्या धाम अइहे |

जगत के कण - कण में बसेले आज श्री राम रघुराई,

जन - जन के मुख आ हिया आज खाली राम नाम कहीहे ।

जगमग - जगमग सजल बा नगरी भक्तिमय आवाम,

बाट जोहेली हर घर में सबरी, कब प्रभु श्री राम अइहे ?

जीवन सफल बनावे खातिर भीड़ भइल अयोध्या धाम,

मधुर भजन अजब नजारा भक्त भजन अविराम गइहे ।

घर - घर में अब दीया जरल अजब दृश्य अभिराम,

ओराइल अगोराई जन मानस जपे नाव श्री राम अइहे ।

कौशल्या नियर नारी जपेली रामलला साँझ -‌ भिनुसार

झिलमिल दीया जरल सजल बा रामजन्म धाम अइहे ।

बाजी रहल बा ढ़ोल मजीरा सुहावन राम भजन हर शाम,

अलौकिक घरी, राममय जन सुमद्र आम राम नाम गइहे ।

गूंजता गांव - नगर के गली आ नारा बा जय श्री राम,

विराजत हिय रामलला लोगवा भक्तिगीत अविराम गइहे ।

जगईहे प्रभु जन हियरा सत्यप्रेम, समर्पन अउरी भातृप्रेम,

जग अनुगामी राम पथ के आज मर्यादा पुरुषोत्तम अइहे ।

शशिलता पाण्डेय 'सुभाषिनी'

बलिया, उत्तर प्रदेश