दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

बरसाना क बहादुर बिटिया

पौराणिक

देव कुमार सिंह

8/2/20251 min read

पौराणिक

बरसाना क बहादुर बिटिया

ई पुराण में नईखे, जवन हम लिखत बानी । एकर कवनो साक्ष पुराण में ना मिली, बाकिर कुछ बात घटना क्रम देखला पर पता चल जाला । अपना दामाद कंस के वध भयिला पर खिसियाई के मगध के राजा जरासंध अठारह बार मथुरा प आक्रमण कईलस । जब ऊ अठारहवां बेर आइल त मथुरा में एगो चिरई भी ना रहे । कृष्ण अपना पूरा परजा सहित द्वारिका में बसि गईल रहलन । सोचे के बात बा कि कंस ओतना बड़ फौज लेके सेतिहे में लवट जाई ? ऊ सटले गोकुल, वृन्दावन, बरसाना प धावा बोललस । ओ समय खाली उहां औरतें रहली स । पुरुष नारायणी सेना में भर्ती होके द्वारिकापुरी चल गइल रहे लोग । ऊहां राधा आ उनकर सहेली गोपी लोग रहे ।

अब तनी कृष्ण के रास, महारास लीला प सोचल जाव ।

ओ घरी गोकुल, बरसाना में दूध, दही, माखन, घी बहुते होत रहे । कर यानी टेक्स के रूप में कंस के दरबार में गोपी लोग पहुंचावे । कृष्ण मटुकी फोड़ के एकर विरोध करस आ ग्वाल बाल के खिआवस आ कहस कि दूध, दही, माखन जे पैदा करत बा उहे खाई, बाचीं तब बेचाई, कर ना दिआई । कृष्ण बंशी बजावस त जमुना नदी के किनारे मैदान में सब लइका लइकी इकट्ठा होखस आ लाठी, भाला, तलवार, धनुष, बाण चलावे के अभ्यास करावस । रास, महारास ना रचावस । इन्द्र देवता के पूजा के गांव में परम्परा रहे । ओह परम्परा के तोड़ के गोवर्धन पर्वत आ गाय पूजा के नया परम्परा चलवले । प्रेति से प्रेम, वृक्ष, नदी, पर्वत से लगाव, जुड़ाव लोगन में बढ़वले ।

एगो चीर हरण के प्रसंग आवेला भागवदपुराण में । ओ घरी कृष्ण के उमिर सात बरिस रहे लइकाई में हमनियो के नदी, तालाब में लंगटे होके नहइले बानी जा । जल में कीड़ा मकोड़ा भी होले, सेहत खातिर ई ठीक ना ह । कृष्ण ई बाति समझावे खातिर ई खेला कईले होईहे । गोप गोपी लोगन के भी उमर सात, आठ बरस से ज्यादा ना होई ।

जब अक्रूर जी कृष्ण - बलराम के रथ प बइठाके ले जाए लगले तब गोप बालक सब लुक छिप के संगे गईले । सब गोपी बुझली कि कंस के आदेश अक्रूर कृष्ण, बलराम के जबरदस्ती मथुरा ले जात बाड़े त अगवाह राह से चलि के रथ के घेर लिहल लोग । सबके हाथ में धनुष बाण रहे, कमर में तलवार रहे । कृष्ण ओ लोगन के समझवले कि ई हमार ताऊ जी हवे, अपना मन से हमनी के जात बानी जा । तब ऊ लोग रथ के जाए दिहल ।

अब पहिलका प्रसंग सुनी । जब जरासंध तेईस अक्षौहिणी सेना लेके गोकुल प आक्रमण कईलस तब राधा के अगुआई में सब गोपी भयंकर लड़ाई लड़ली । ओकर सब सेना मरा गईल । आ ऊ आपन जान बचाके परा गईल । फेरु कबहूं झांके एने ना आइल । पूरा ब्रजमंडल में खुशी खिलखिला गईल । सब लोग मिलि के राधा जी के रानी बनावल आ तबे से ऊ राधा रानी, श्रीजी, लाड़ली जी कहाए लगली । उनका राज में केहू भूखा ना रहे, कवनो परकार के अभाव ना रहे, केहू बीमार आ लाचार ना रहे । दूध, दही, घी,मक्खन के बिछीलहर भईल रहे । बाकीर पुरुष के वर्चस्व वाला समाज में लोग के राधा जी आ गोपी लोगन के वीरता घोंटाइल ना । स्त्री के प्रेम,भक्ति, समर्पण देखावे खातिर मन से कहानी गढ़ि के बड़का बड़का ग्रन्थ लिखि दिहल लोग । कृष्ण के राधा से प्रेम रहित त मथुरा से वृंदावन के दूरी कवनो ढेर नइखे । कंस के मारला के बाद एको दिन खातिर ऊ जरूर आइल रहते ।

हम कई बार मथुरा, वृन्दावन गईल बानी आ ऊहवाँ के औरतन के गाय के खियावल, दुहल, अथक मेहनत, निडरता, बहादुरी,आचरण के पावनता देखि सुनि के इहे कहानी साँच बुझाता ।

जय बरसाना के बहादुर बिटिया। जय बहादुर गोपी लोग ।

देव कुमार सिंह

परिखरा, बलिया

सचल दूरभाष- 7376866881