दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

पत्थर कोइला

कविता

अंकुश्री

12/19/20251 min read

(भोजपुरी कविता)

पत्थर कोइला

करिआ कोइला

ओकर रंग बदलल

जर के लाल हो गइल ।

जतने ठंडा रहे

ओतने लहलहात

गरम धमाल हो गइल ।

केहू के गरमी

देर ले ना ठहरे

त उहे हाल हो गइल ।

पत्थर जस कोइला

आग से करत यारी

ओकर काल हो गइल !

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अंकुश्री

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