दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
पतोहिए मालिक बनल बिया
कविता
राजेंद्र राज
2/22/20261 min read


पतोहिए मालिक बनल बिया
पेट काट पढ़ौली बबुआ के
माई कहत बिया
अईसन जमाना आईल पतोहिए
मालिक बनल बिया
भारत आपन रह के भी
ब्रिटिश के राज रहे
वोईसे घर में राज पतोहिया
हुकुम चलावत बिया
दिन दुनिया देखत बाटे पर
केहू ना कुछ बोले
घर घर एक ही हाल भइल बा
जरेला सब कर जिया
बेटा परल बा दुविधा में
राह न तनिक बुझाता
तोहरो अईसने नौबत आई
जवन बोअत बाडू बीया
अब से हो समझावत बानी
समझ ल ए तू कनिया
बैठ अकेले झख मरबू तू
परदेशी बन जाई पिया
एतना मत हो राज चलाव
बदल ल आपन रहनिया
ना त नईहरे दिन बीत जाई
बजई ह खूब हरमूनिया
राजेंद्र राज
चंदन नगर, हुगली
कोलकाता
