दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
नेह के डोर
कविता
श्वेता पाण्डेय मिश्र ‘खुशबू’
12/13/20251 min read


नेह के डोर
जे एतना बरियार बा कि ,बान्ह ले चारो ओर,
जो तनिको भइल एनी - ओनी टुटेला पुरजोर
ई ह नेहिया के डोर..
कहिं केहू आस लगवले देखता काल्ह की ओर,
आस से जे विश्वास टूट गइल मनवा होला थोर
ई ह नेहिया के डोर..
माई - बाबू जुगति जे करे, कइसो कइलीं बबुआ के बड़,
दुख पराई, मन हर्षाई, घाव जिनिगी के कुल भरजाई
ई ह नेहिया के डोर..
लाल के चाल हरेला जे दुख, माई के अंचरा भरेला कुल सुख,
बाबू के पगरी भईल जे बड़, दुखवा के रतिया परेला बिसभोर
ई ह नेहिया के डोर..
अंसवारी के कवनो कनिया, आस लगवले बइठल बनिया
मने - मने करे बिचार, मिलिहें कइसन ‘कुल’, खरीदार
ई ह नेहिया के डोर..
कबो कहीं त राही चलते, देख औरन के हियरा छलके,
बाबा - काका कुल मिलजालें, बाटी के क्षनभर बाट हेराले
ई ह नेहिया के डोर..
मीत के बा मिताई इहवां, कुनबा में हिताई इहवां,
गांव जवार कुल सगे लागे, बिन बोलवलें आगे - पाछे
ई ह नेहिया के डोर..
बिनु रिश्ता के बात निभावे, सोचले भर से मुस्की आवे,
कहे तनि कुछु ढेर छिपावे, केहू ताके कनखी आ कोर
ई ह नेहिया के डोर..
बात ना जाने बा दूर कि नियरा, आ जाला जेकरा पर जियरा,
छिन जाला सुख - चैन हिया के, जस छछनेला चाक - चकोर
ई ह नेहिया के डोर..
एहिमा जग हेराईल बाटे, जाने - अनजाने भरमाईल बाटे,
आपन - आपन नेह निहारे, का जशोदा का माखनचोर
ई ह नेहिया के डोर..
श्वेता पाण्डेय मिश्र ‘खुशबू’
कानूनी सलाहकार, दीया बाती
बलिया
