दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
नीयत
ग़ज़ल
कृष्णदेव घायल
12/20/20251 min read


ग़ज़ल
नीयत
केहु कहलस कि पूरा अरमान हो गइल
आधिरतिये बुझाइल बिहान हो गइल
जवन पोंसल रहल बा नन्हइयें से ऊ
कल्ले कल्ले सपनवाँ सेयान हो गइल
साँच के साथ धइले उमिर चलि रहल
झूठ बोलल ऊ मनई महान हो गइल
का पता कब्बों खाले ढकेलिये दिहें
पोढ़ अतना भरोसा, बेजान हो गइल
पी के असरा के पानी जियल जा रहल
खाके धोखा जिनिगिया जियान हो गइल
थूकि के चाटि के फेरु थूकल - चाटल
का कहल जाउ बेहया के खान हो गइल
टेढ़ नीयत लगे जइसे धनुहीं 'घायल'
बात हियरा के बिषिआइल बान हो गइल
कृष्णदेव घायल
