दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

नदियन के दुर्दशा पर एगो गीत

गीत

शशि प्रेम देव

3/15/20261 min read

नदियन के दुर्दशा पर एगो गीत

भोगि रहल बा नाजे केकर / करनी कइल नदी !

-- जनमे से रहि गइल पखारत / सबकर मइल नदी !!

उजरि गइल सज्जी सुघराई

कइसन रोग लगल !

लउके ना सुध लेबे वाला

केहुए अगल - बगल !

-- रहल कबो चन्नन, अब तs / लागे मँगरइल नदी !!

कइलस पाप कवन अइसन जे

किसमत फूटि गइल !

नइहर से दुत्कार मिलल, आ

ससुरो छूटि गइल !

-- टिकुली - सेनुर - चूडी अछइत / बिधवा भइल नदी !!

ईहे हाल रही त' आगा

करी भलाई के ?

परमारथ के हवन - कुंड में

हाथ जराई के ?

-- दुनिया का पाछा अमरित से / विष हो गइल नदी !!

गीत

काहें मोर झुराइल

राउर गाल गुलाबी बा ?

-- बोलीं, कवन खराबी बा ना ?

हमहूँ मनई, रउवो मनई

रउवा चन्नन - जस, हम कनई

-- रउवा छुट्टा चरलीं

मुँह पर हमरा जाबी बा !!

बोलीं, ...

रउवे पाले महल - अटारी

नोकर - चाकर - घोड़ा - गाड़ी

-- काहें पुहुत - पुहुत से

रउवे ठाठ नबाबी बा ??

बोलीं, ...

होयी कइसे सुफल सुराज

रउवे बोलीं ए, महराज

-- जबले लोकतंत्र के

सज्जी बात किताबी बा !!

बोलीं, ...

तूरब रावन के अभिमान

अब नइखीं हमहूँ अन्जान

-- कि कहँवाँ अमृत बाटे

कहवाँ राउर नाभी बा !!

बोलीं, ...

शशि प्रेम देव

( बलिया )

--०००--