दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
ग़ज़ल
महफिल
जमील मीर
12/20/20251 min read


महफिल
महफिल मे हमहू मुस्कुरा देइलें ।
दुख मे केहू साथ ना देला, एहिसे आंसू छुपा लेइलें ।।
लोग के देख के लोग जरेला इंहवा
केहू के दुख देके लोग तरेला इंहवा
लेकिन अकेले मे पुछले पर दुख बता देइले ।
महफिल मे हमहू मुस्कुरा देइलें ।।
ई चका चौंध दुनिया मे दिखावा बस बाटे
जियले मे कुछ नाहीं मुवले पर पछतावा बस बाटे
दिखावा मे दु लोटा आंसू बहा देइले ।
महफिल मे हमहू मुस्कुरा देइले ।।
केकरा के लूटीं, केकरा के दबाई
आदमी से बढ के, के बा कसाई
एक दिन मुए के बा सभके ई भूला देइले ।
महफिल मे हमहू मुस्कुरा देइले ।।
कमजोर के देख के दबंगई देखावे
मीले बरियार त मुड़ी झुकावे
ई दुनिया के किस्सा सुना देइले ।
महफिल मे हमहू मुस्कुरा देइले ।।
जमील मीर
कुशीनगर
