दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

बलिया जिला के तीन गो अउरी जाग्रत मंदिर

मंदिर

विनय बिहारी सिंह

8/15/20251 min read

बलिया जिला के तीन गो अउरी जाग्रत मंदिर

रउरा सभे जानते बानीं कि बलिया जिला महान ऋषि भृगु जी के तपस्थली ह । ऊहे भृगु जी जवन ज्योतिष के अमर पुस्तक लिखले बाड़े - "भृगु संहिता'' । त भृगु ऋषि के प्रभाव से उच्च कोटि के बहुते साधु-संत लोग एह जिला में आ के रहल आ बलिया जिला के धन्य कइल लोग । ओही में से कुछ साधु-संत एइजा जगह-जगह जाग्रत मंदिर तइयार कइल लोग । आजु बलिया जिला के कुछ अइसने जाग्रत मंदिरन के बारे में आईं चर्चा कइल जाउ ।

सबसे पहिले बाबा बालखंडीनाथ के मंदिर । बलिया से बांसडीह जाए वाला रोड पर दिउली ग्राम पंचायत में बाबा बालखंडीनाथ के मंदिर बा । त अद्भुत काहें बा ई भगवान शिव के मंदिर । एइजा भक्त लोग अपना मनोकामना पूर्ति खातिर घंटी बान्हेला । ओइजा के एगो पुजारी जी बतउन कि एह मंदिर में देश भर से लोग आवेला । आ एइजा सबकर मनोकामना पूरा हो जाला । एही से लोग घंटी बान्हत रहेला । सबकर मनोकामना ? उत्सुकता से हमहूं ओह मंदिर में गइनी । सचहूं ओइजा धातु के अनगिनत घंटी बान्हल रहली सन । अचानके मन परल घंटी भा घंटा "ऊ ध्वनि के प्रतीक है, जवना के हमनी के धार्मिक आध्यात्मिक ग्रंथ प्रणव ध्वनि कहले बाड़े सन । कहल बा कि प्रणव ध्वनि केहू उत्पन्न ना क सकेला । ई ध्वनि अपने आप प्रकट होले आ "तैल मिव धारम माने तेल के निरंतर धारा जइसन समूचा ब्रह्मांड में व्याप्त बिया । "ॐ शब्द के ईश्वर ध्वनि कहल बा । जे ओंकार ध्वनि से एक हो जाई ऊ ईश्वर से एक हो जाई । त एही से घंटी बान्हल देखि के भक्त लोगन के आ बाबा बालखंडीनाथ के हम प्रणाम कइनी । बाबा बालखंडीनाथ मंदिर के निर्माण के लेके एगो कथा बा

एगो राजा रहले जिनकर नांव रहे सुरथ । राजा सुरथ कौनो युद्ध में बुरी तरह हार गइले । दुखी हालत में ऊ धरती के गर्भ से निकलल बाबा बालखंडी नाथ के पूजा आ जप करे लगले । कुछ दिन बाद चमत्कार भइल आ राजा सुरथ पर देवीं पा भइल । राजा के लागल कि उनकर शक्ति फेर बढ़िगइल बा । ऊ शारीरिक आ मानसिक रूप से बलवान हो गइल बाड़े । भक्ति के आनंद में ऊ बाबा बालखंडीनाथ के ई मंदिर बनवा दिहले । फेर समय-समय पर एह मंदिर के मरम्मत आ रंगरोगन होखे लागल ।

छोड़हर के राममंदिर में भगवान राम, सीता माता, लक्ष्मण जी, रामभक्त भगवान हनुमान जी आ एगो खूबे सुंदर शिवलिंग देखि के मन मुग्ध होगइल । एह मंदिर के ओइजा के एगो बड़ पुलिस अधिकारी रिटायर भइला का बाद बनवले बाड़े । ई पुलिस अधिकारी भगवान राम के आपन इष्टदेव मानत रहले एतना सुंदर मंदिर देखि के ओह दिवंगत पुलिस अधिकारी के मने मन आभार जतवनीं । कहल बा कि राम मंत्र बहुते सहज आ प्रभावकारी मंत्र ह । गोस्वामी तुलसीदासलिखले बाड़े- 'जा पर कृपा राम की होई,ता पर कृपा करहिं सब कोई' । जेकरा पर राम जी कृपा क दिहें,ओकरा पर सब कृपा करी । ओकर हर काम आसान हो जाई । राम मंत्र के महिमा अपरंपार कहल बा । राम के नाव अनपढ़ आदमी भी क सकेला हालांकि आजकाल शायदे केहू अनपढ़ होई । छोड़हर के मंदिर में दुकत का घरी ई अनुभव भइल कि जैसे सचहूं कौनो राम दरबार में जातानी । ओइजा से आगा बढ़नी त ब्रह्माणी मंदिर जेकरा के भोजपुरी में बरमाइन मंदिर कहल जाला का ओर चल दिहनी ।

ब्रह्माणी मंदिर के एगो रोचक कथा बा । माता के ब्रह्माणी काहें कहल जाला ? निराकार ईश्वर के ब्रह्म कहल जाला । आ ब्रह्म के माता रूप के ब्रह्माणी कहल जाला । एकर मतलब ई कि भगवान के माता रूप के कई गो नांव में से एगो नाव ब्रह्माणी ह । ईहो बहुते जाग्रत मंदिर ह । कहल जाला कि रउरा कौनो मनोकामना लेके जाईं आ ऊ मनोकामना शुभ होखे त माता ब्रह्माणी ओकरा के जरूर पूरा क देली । ओइजा भक्त लोगन के भीड़ लागल रहेला । त ई मंदिर बलिया से सिकंदरपुर जाए वाली सड़क पर हनुमानगंज का लगे बा । ओइजा हम एगो भक्त मेहरारू से पुछली कि बरमाइन (ब्रह्माणी) मंदिर के महिमा के बारे में कुछ बताई । त ऊ कहली कि हम त एतने जानतानी कि जब कौनो दुख परेला त हम एइजे दउरल आवेनीं । परसादी चढ़ावेनी, पूजा क के प्रणाम करेनी त हमरा भीतर शांति नियर बुझाला । आ धीरे-धीरे हमार ऊ दुख दूर हो जाला। केहू दोसरा से पूछीं कि एह मंदिर के महिमा का बा, त हम जतना आदमी से पुछनीं,सब ओह मेहरारू के बात के पुष्टि कइल । त ईश्वर भक्ति के कई गो रूप रउरा देखे के मिली। नारद मुनि नवधा भक्ति के वर्णन कइले बाड़े । नवधा भक्ति के चर्चा रामचरित मानस में भी आइल बा । भगवान राम जब शबरी के नवधा भक्ति के बारे में बतवले त शबरी के आनंद के सीमा ना रहे।

नवधा भगति कहउं तोहि पाहीं.

सावधान सुनु धरु मन माहीं

प्रथम भगति संतन्ह कर संगा,

दूसरि रति मम कथा प्रसंगा ।।

त नवधा भक्ति के महिमा अपरंपार बा । संत लोगन के संगति क के ओह लोगन के बात केश्रद्धा से श्रवण, राम कथा के प्रसंग चर्चा,कीर्तन, स्मरण, जप, पूजन, चरण सेवा, अर्चना आ दास्य भा सख्य भाव ।

श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम् ।

अर्चना वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम्

त मंदिर यात्रा से बहुत कुछ मिलल । प्राचीन कथा त सुने के मिलबे कइल,भक्ति के तरीका भी एक बार फेर याद आ गइल । त हमनी के नौ तरह से भक्ति में कौनो एगो ध लेब जा त जीवन धन्य हो जाई। बहुत नास्तिक आदमी बाड़े जे धर्म आ ईश्वर के नाव सुनि के मुंह बिजुका देले । ओकरा खातिर एगो बहुत प्रचलित कथा बा- एगो राजा अपना विद्वान मंत्री से पुछले कि तू हमरा के ईश्वर दर्शन करा सकेल । त मंत्री कहले कि हमरा के एक महीना के समय दीं। मंत्री जी बहुत परेशान भइले । भगवान के दर्शन ऊ खुदे नइखन कइले त राजा के कहां से करवा दिहें । उनका के चिंतित देखि के उनकर जवान लइका पुछलस कि पिता जी काहें चिंतित बानीं । मंत्री जी राजा के प्रश्न सामने राखि दिहले । उनकर लइका कहलस कि ई कौन भारी बात बा । रउरा हमरा के राजा के लगे ले चलीं । हम उनका के आज भगवान के दर्शन करा देब । मंत्री जी अपना लइका के राज दरबार में लिया गइले आ राजा से कहले कि हुजूर हमार लइका रउरा के भगवान के दर्शन करा दी। राजा कहले कि ठीक बा । लइका से राजा कहले कि ठीक बा तूं भगवान के दर्शन कराव । मंत्री के लइका राजा के एगो एकांत कमरा में ले गइल आ कहलस कि एक लीटर दूध मंगावल जाउ । बर्तन में दूध आ गइल । लइका कहलस कि एह दूध में मक्खन केने बा । राजा कहले कि नौजवान मक्खन त दूध भा दही के मथला पर मिली । त लइका कहलस कि सरकार, भगवान भी ध्यान-साधना के मथानी से मिलिहें । भगवान के दर्शन एतना सहज नइखे । जइसे दूध के मथला पर मक्खन मिली, ओहीतरे जप, ध्यान आ गहिर साधना कइला से भगवान के दर्शन मिली ।

मंदिर दर्शन क के लौटे लगनी त एगो साधु जी मिलले । उनका से कहनीं कि भगवान के बारे में कुछ बोलीं । त ऊ बड़ा रोचक जबाब दिहले । कहले- "राम कथा ही कथा ह, बाकी सब व्यथा ह।" एतना संक्षेप में एतना गूढ़ बात सुनि के हम चकित हो गइनीं। एगो घुमंतू साधु अपना आस्था आ विश्वास में कतना मजबूत बाड़े एकरा से बड़ उदाहरण का होई ।

विनय बिहारी सिंह

सुखपुरा, बलिया

पूर्व प्रधानाचार्य माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय

कोलकाता स्टडी सेंटर इंस्टीट्यूट आफ जर्नलिज्म ।