दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
लइका सयान हो गइल
कविता
विजय मिश्र
7/19/20251 min read


1.
लइका सयान हो गइल
लइका हने ला जबाब अब सयान हो गइल
बहू अड्ली घरे अलगा चुहान हो गइल ।।
पहिला रिस्ता टूटल जाता नवका रोज धराता
ननिअउरा त यादि न आवे बढ़ल सढु़आ नाता
माई बाबू काटे ससुररिया परान हो गइल
बहू अइली घरे अलगा चुहान हो गइल ।।
टूटहा भंगहा गउँवा घरवा बाबूजी के बाटे
बबुआ जी आवे ले त लागे ला कुक्कुर काटे
सहरे मेहरी के नावे मकान हो गइल
बहू अइली घरे अलगा चुहान हो गइल ।।
मोका पाके लागल दुसमन सटि सटि के बतियावे
मिलल सुतार त जइसन तइसन उलिटा पाठ पढ़ावे
रहे बिगरे के तऽ उलिटा धियान हो गइल
बहू अइली घरे अलगा चुहान हो गइल ।।
कान भराए लागल उनुका मन में पाप समाइल
जिनिगी भर के कइल धइल छन में कहाँ विलाइल
कुछऊ सिखलवला पर लागे अपमान हो गइल
बहू अइली घरे अलगा चुहान हो गइल ।।
जब ले बा लरिका कुँवार तबे ले आपन बूझीं
ओकरा के पाले पोसे में दुख संग हरदम जूझीं
पढ़ल लिखल बेटा देखते अनजान हो गइल
बहू अइली घरे अलगा चुहान हो गइल ।।
2.
चलत काम भगवान भरोसे
घूमि घूमि के देखि ल ऽ भइया
परल होस बाटे मद होसे ।
चलत काम भगवान भरोसे ।।
जाने कइसन ई आजादी
खउरा खपटन के बा चाँदी
के रोकी कइसे बरबादी
नवका देख ऽ चलन चलल बा
दागी संगवा ले ले पोसे
चलत काम भगवान भरोसे ।।
सभे लुहेंड़ा आगे भइलन
पा जोगाड़ जगहा पर गइलन
बहती गंगा छउकी नहइलन
सामिल बाजा बाजि रहल बा
मारि खात खाली निरदोसे
चलत काम भगवान भरोसे ।।
गलते पोसल ढोवल जाता
झूठ मूठ के रोवल जाता
जवनो बाँचल खोवल जाता
हहरा ढूकल बा सगरे अब
रिस्वत ले ले खूब भकोसे
चलत काम भगवान भरोसे ।।
पाठ पढ़ाई में ना दम बा
कवन विभाग कवना से कम बा
सबमें बइठल ढींठ अहम बा
जोगवल सपना टूटि रहल तऽ
दसा देखि के मन मसोसे
चलत काम भगवान भरोसे ।।
विजय मिश्र
सुहवल, कुसौरा, बलिया, उत्तर प्रदेश
हा०मु० - टण्डवा, बंकवा, बलिया (उ०प्र०)
पूर्व प्रधानाध्यापक - रामझलक चौवे पूर्व, माध्यमिक विद्यालय टण्डवा, बंकवा, बलिया
