दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

शंख फूँकीं कृष्ण

कविता

उमेश कुमार पाठक 'रवि'

7/14/20251 min read

शंख फूँकीं कृष्ण

1.

शंख फूँकीं कृष्ण

शंख फूँकीं कृष्ण, रहे दीं मधुर बँसिया ।

बनी सारथी आ हाँकी रथ फेरु सथिया ।

कतने द्रौपदी लुटइली,

पापी हाथ से हतइली,

काटि फिरीज में रखइली,

फिर अटएची फेंकइली,

अब धरमी के काम नाहीं करे मतिया ।

कांड होत, होला हाला,

तब टिआरपी बढ़िआला,

टीवी पर बहस खिंचाला,

एक दिन सभई भुलाला,

कहिया देखी अब धरम बचावल अँखिया ?

बा कुकरमीन के राज,

ओहने माथे चढ़े ताज,

राजा भइले हवाबाज,

गिरे धरमे पर गाज,

मित आईं पापी खिंचेले धरम सड़िया ।

अफगाने मेटि गइनी,

पाक आ बंग्ला हतइनी,

काशमीर से खेदइनी

केरल, बंग मिटे भइनी,

सुदर्शन उठाईं आ मेटाईं पपिया ।

सीता सावित्री के देश,

रखनी रखल कनुनी-ऐश,

कुलटा संगे जनादेश,

वध गो जायज ए शिवेश,

कलमुँहन वधे के चकर चलाई रसिया ।

2.

बजल धरम क डंका

मंदिर भइल आजाद अवध में,

बजल धरम क डंका ।

राम भजन गुँजल जगती में,

अमरीका भा लंका |

लाल चौक पर झंडा गाड़ल,

दुल$म रहे हुजूर ।

देशभक्त शासक होखल त,

चाँद रहल ना दूर ।

पलटि गइल अधरम के पासा,

रावन कंस निराशा ।

राम-धरम पर अकबक बोलस,

उगिलस जहर हताशा ।

देखीं देश हजार बरिस तक,

कइसे रहल गुलाम ।

राम आगमन होत अजोध्या,

दिखले फनिक तमाम ।

रामनाम के लूट मचल बा,

रउवो लीं ना लूट ।

राजनेति क नरक से निकलीं,

प्रान जाउ ना छूट ।

चलs देखिलs न राम अवधs अइले

चलs देखिलs न राम अवधs अइले,

चलs देखिलs

पाँच सइ बरिसs के गुलमिया बिलsइली,

अवध राजधानी फेर झूमि अगरइली,

फेरु सरजू के तीर मगनs भइले,

चलs देखिलs

ना मोरा राम के, से कवना काम के,

दरसन के उमड़ल सब, राम अभिराम के,

साँच, सचहूँ सनातन सपनs भइले,

चलs देखिल ।

बीस गो वोकिल राखि, कोट में जे लड़ल,

जनमभू मेटावे में, हाथ धोइ पड़ल,

छलियन के कल-छल बेकारs भइले,

चलs देखिल ।

कटत मिटत खंडे-भारत बा बाँचल,

राम के लहरs देश, झूमि-झूमि नाचल,

हिंद हहरत हियरा अँजोरs भइले,

चलs देखिलs

दरसन के तरसत पचीसो पीढ़ी गलल,

लाखो बलिदान भइले, धरम गइल छलल,

अवधs अजादी रामराजs अइले,

चलs देखिल ।

उमेश कुमार पाठक 'रवि'

वनशक्ति नगर, वार्ड नo: 08,

आई टी आई रोड,चरित्रवन,

बक्सर (बिहार) 802101