दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
करनी
लघुकथा
मूल कथाकार : सआदत हसन मंटो अनुवाद : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल
12/28/20251 min read


लघुकथा
करनी
मूल कथाकार : सआदत हसन मंटो
अनुवाद : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल
लूटल माल बरामद करे खातिर पुलिस छापा मारे शुरू कइलसि । लोग डर का मारे लूटल माल रात का अन्हारा में बाहर फेंके लागल । कुछ अइसनो लोग रहन, जे अपनो सामान मोका निकाल के हटा दिहले, ताकि कानून के लफड़ा से फरके रहसु ।
एक आदमी के ढेर दिक्कत भइल । ओकरा पास चीनी के दू गो बोरी रहे जवन ऊ पंसारी का दोकान से लुटले रहे । एगो त जइसे तइसे ऊ रात का अन्हारा में बगल वाला इनार में फेंकि आइल, बाकिर जब दोसरकी ओमें डाले लागल त अपनहूँ चलि गइल ।
हल्ला भइल । लोग जुटल । इनार में डोरि लटकावल गइल । कुछ लोग इनार में ढूकल आ ओह आदमी के बाहर निकाल लिहल, बाकिर थोरहीं देर बाद ऊ मर गइल ।
दोसरा दिने जब लोग पीए खातिर इनार से पानी निकालल त ऊ मीठ हो गइल रहे । ओही रात ओह आदमी का कब्र पर दीया जरत रहे ।
