दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

का होई

भोजपुरी कविता

अंकुश्री

3/15/20261 min read

का होई

पत्ता जस

जब तन डोले

तब

मन के गति के

का होई ?

जवना आन्ही में

उड़े अटारी

झोपड़ी के

ओह में

का होई ?

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जदि बुझा जाए.

हर घास पर

मुक्ता गिरल बा

जदि चुना जाए

हर सांस पर

आस टिकल बा

जदि गिना जाए

हर हाट में

ठाट बिकत बा

जदि किना जाए

फूल खिल के

गिरल जात बा

जदि मुरझा जाए

हर राह से

लक्ष्य मिलत बा

जदि बुझा जाए

---0---

अंकुश्री

8, प्रेस कालोनी, सिदरौल,

नामकुम, राँची (झारखंड)-834 010

चलभाष : 62049 46844

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