दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
जिनगी
ग़ज़ल
रामनाथ यादव 'बेखबर'
7/24/20251 min read


जिनगी
ग़ज़ल - 1
कहाँ कहियो हँसके हँसावे ले जिनगी
बहुत नाच हमके नचावे ले जिनगी
मनावे के दुनिया मनावे जनम दिन
उमिर सबके लेकिन घटावे ले जिनगी
कहाँ कुछउ दुनिया में हमनी के बाटे
मगर केतना सबके रिझावे ले जिनगी
इहे रंग जिनगी के सुन्दर बहुत बा
अन्हरियो में रस्ता दिखावे ले जिनगी
कबो ऊँख जइसन निचोड़े ले सबके
कबो गोड़ धर के मनावे ले जिनगी
भईया इहे हमरा देखे के बाटे
कहाँ से कहाँ ले निभावे ले जिनगी
ग़ज़ल - 2
घर में जब तकरार भइल
आँगन में दीवार भइल
गाँव - गाँव में देखीं अब
बस एकल परिवार भइल
खेवनहार क किरिपा से
नाव भँवर से पार भइल
कब बकरिन के साहस से
बाघन के बा हार भइल
इ नेतवन के करनी से
देश क बंटाधार भइल
महँगाई के मार पड़ल
सिर पे बहुत उधार भइल
हमरा अइसन लागत बा
मायावी बाजार भइल
ग़ज़ल - 3
आपके सच कहल हो गइल
जिनगी अब गरल हो गइल
मन कहाँ अब सुनेला तनिक
जाने कब बेकहल हो गइल
दर्द जब-तब मिलल प्यार में
दर्द लिखली गजल हो गइल
शेर पढ़नी जे हम हिज्र के
हमरी अँखिया सजल हो गइल
पांव जइसे पड़ल आपके
हमरी झुग्गी महल हो गइल
ग़ज़ल - 4
जेतना हो सके घटावत जा
बात से बात मत बढ़ावत जा
काम मुश्किल बा फिर भी हो जाई
पहिले टेबुल पे कुछ चढ़ावत जा
हमके सब कुछ समझ में आवता
पट्टी हमरा के मत पढ़ावत जा
जान से बढ़के दोस्ती होला
दोस्ती पर भी कुछ लुटावत जा
दूर नफरत ई कहियो हो जाई
रंग मिल्लत क तू लगावत जा
राम नाथ 'बेख़बर'
संपर्क - 8/1,एस. एम. बाई लेन, बाँसबगान,चापदानी
पोस्ट - वैद्यबाटी, जिला - हुगली
पिन - 712222 ( पश्चिम बंगाल )
