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सइयाँ हो गइले सराबी : जीयल मुसकिल

एगो झूमर

सुशीला पाल

3/15/20261 min read

--- एगो झूमर ---

सइयाँ हो गइले सराबी : जीयल मुसकिल !! - 2

खेत - खरिहान - बारी / बेंचि दिहले सगरी

घर आ दुआर बेचले / रहीं कवने कगरी

-- केकरा से माँगीं खाये खाती तील- तील !!

सइयाँ...

काड़ा - छाड़ा - हँसुली बेचले / बेचले लोटा - थरिया

बेंचि दिहले कूल्हि ऊ / ले जाइके बजरिया

-- हमरे नसीब बिधना ठोकि दिहले कील !!

सइयांँ...

जूठ - काठ माँजि / दूइ रोटी हम जुटावेलीं

मूँह देखि लइकन के / दुख बिसरावेलीं

-- मन करे जाके डूबि जाईं कवनो झील !!

सइयाँ...

पीये खाति रोकेलीं तs / दोषिहा बनावे ले

'बोलबू तs फूँकि देबि जीयते' / धिरावेले

-- रोजे - रोजे हमनीं के करेले जलील !!

सइयाँ...

सुशीला पाल

बलिया, (उ०प्र०)

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