दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
इंसान के असली मोल
ग़ज़ल
तौसीफ़ अहमद
12/28/20251 min read


इंसान के असली मोल
ना पूछऽ का छुपल बा गगन से, बा ज्ञान में ।
हर साँच के उजास मुखड़ा, बा ज्ञान में ।
दुनिया के रंग, धरम-करम, साँच आ नेकी के बात,
जे सोच के दीया जले, ऊ बात सब, बा ज्ञान में ।
कागज़ ना खाली, दिल-दिमाग़ के भी होखे सीख,
जवानी के तरीका, बुजुर्गी के रीत, बा ज्ञान में ।
तलवार से ना हर दुविधा के होला हल,
शांत बुद्धि आ निमन निर्णय, बा ज्ञान में ।
जवन ना डोले आँधी-पानी में, अइसन दीप,
करे जोत से बात, ऊ आग भी, बा ज्ञान में ।
‘तौसीफ़’ कहे ना ऊंच-नीच देखऽ, ना जात,
इंसान के असली मोल, रंग सब, बा ज्ञान में ।
तौसीफ़ अहमद
ब्रह्मपुर, बक्सर, बिहार
