दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

हुकुम बजाना

कविता

अनिरुद्ध कुमार सिंह

2/15/20261 min read

हुकुम बजाना

----------------

जिनगी लागे सफ़र सुहाना ।

मालिक के सुंदर नजराना ।।

हँसते आना रोते जाना ।

दुनिया जानें चलन पुराना ।।

*

भटके सब धरती पर आके ।

लागेला सबकुछ अंजाना ।।

जोड़ें छोड़ें रिश्ता नाता ।

हर पल लागेला मस्ताना ।।

*

देशाटन सबके मन भाये ।

मानव बन जाला दीवाना ।।

पाप पुन्य के चादर ओढ़ें ।

धन दौलत के ताना बाना ।।

*

रातो दिन नित सैर सपाटा ।

हर मौसम में बा इतराना ।।

मानव मन चंचलता घेरे ।

मन मोहेला रूप सुहाना ।।

*

गमन लगे सबसे दुखदाई ।

अंत समय सबके बा जाना ।।

गठरी में ठठरी के बांधें ।

हो जाला सब छोड़ रवाना ।।

*

काया माया में लिपटाइल ।

मन मरजी इहँवा बा माना ।

दुनिया के अजबे संरचना ।

काम इहाँ बस हुकुम बजाना ।

*

अनिरुद्ध कुमार सिंह

धनबाद, झारखंड

9931562396