दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
हुकुम बजाना
कविता
अनिरुद्ध कुमार सिंह
2/15/20261 min read


हुकुम बजाना
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जिनगी लागे सफ़र सुहाना ।
मालिक के सुंदर नजराना ।।
हँसते आना रोते जाना ।
दुनिया जानें चलन पुराना ।।
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भटके सब धरती पर आके ।
लागेला सबकुछ अंजाना ।।
जोड़ें छोड़ें रिश्ता नाता ।
हर पल लागेला मस्ताना ।।
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देशाटन सबके मन भाये ।
मानव बन जाला दीवाना ।।
पाप पुन्य के चादर ओढ़ें ।
धन दौलत के ताना बाना ।।
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रातो दिन नित सैर सपाटा ।
हर मौसम में बा इतराना ।।
मानव मन चंचलता घेरे ।
मन मोहेला रूप सुहाना ।।
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गमन लगे सबसे दुखदाई ।
अंत समय सबके बा जाना ।।
गठरी में ठठरी के बांधें ।
हो जाला सब छोड़ रवाना ।।
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काया माया में लिपटाइल ।
मन मरजी इहँवा बा माना ।
दुनिया के अजबे संरचना ।
काम इहाँ बस हुकुम बजाना ।
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अनिरुद्ध कुमार सिंह
धनबाद, झारखंड
9931562396
