दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

बरसि जाई बदरी

ग़ज़ल

डॉ कादम्बिनी सिंह

12/20/20251 min read

ग़ज़ल

1

बरसि जाई बदरी न तनिको पटाई ।

बुझाता कि सउँसे चंवर डूब जाई ।

करेजा में अइसन लहर उठ रहल बा

जियाई भा हमके ई अजुये मुआई ।

सुनs हो तनी हाल हमरो से पूछs

कि खलसा सवतिये के चिठिया लिखाई ।

पिरितिया के लमहर भइल बे लतरिया

भेंटा जाई तोहके त हमके भेंटाई ।

बिलाए ला, जाके मिलल नइखे उनसे

समुंदर से कहि द उ लोरवो गिनाई ।

2

बीतल कुल बतिया बिसरावs, जाए द

अझुराइल जिनगी सझुरावs, जाए द ।

बतियन के पेहना में मुरचा धइले बा

छूटी नू, चल के बतियावs, जाए द ।

नदिया के तीरे नइया मत राखs, तूं

आवs नदिया में उतरावs, जाए द ।

ठटका खा के पेट गड़े जेकर, ओके

बसिये दे के पेट सोन्हावs, जाए द ।

हल्ला सुनिके कान बड़ा अगुताइल बा

अब त एगो गीत सुनावs, जाए द ।

सउँसे गंउवां में छपलस अनहरिया त

तूंहीं एगो दीप जरावs, जाए द ।

डॉ कादम्बिनी सिंह

शिक्षिका आ कवयित्री

बलिया