दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
जे घर में बोले दूसर भाषा
कविता
शिवम तिवारी
2/22/20261 min read


जे घर में बोले दूसर भाषा
जे घर में बोले दूसर भाषा,
उ अलख जगावे भोजपुरी के ।
लिखे - पढ़े में लाज लागे,
मांग करे भोजपुरी के ।
बुझाते नइखे अइसे कईसे,
मान्यता मिली भोजपुरी के ।
सुनीं ए आपन भोजपुरिया भाई,
शिवम् कहे ले माथ नवाई ।
पहिले आपन भोजपुरिया के,
सुख - दुख में जा के साथ निभाईं ।
आवे जो कवनो बीपत त,
ओकरा साथे खड़ा हो जाईं ।
मिलीं - जुलीं एक दूसरा से,
आपस में व्यवहार बनाईं ।
घर में रहीं भा बाहर जाईं,
मिले जो कवनो भोजपुरिया त,
अपने भाखा में बतियाईं ।
भोजपुरिया जब एक हो जईहे,
मन के आपन भेद मिटईहे ।
तबे जाके भोजपुरी के,
दुनियां में झंडा लहराईं ।
निहोरा बाटे इहे शिवम् के,
कहस आपन माथ नवाई ।
शिवम तिवारी
रिसड़ा कोलकाता
