दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
दुख के गठरी
ग़ज़ल
राम नाथ बेख़बर
12/20/20251 min read


ग़ज़ल
दुख के गठरी
मन में धधकत अगन के बुतावे परी
दुख के गठरी भी हँस के उठावे परी
घाव इक दिन भरी ई भरोसा रखीं
रोज मरहम समय पर लगावे परी
घाम पानी से चाहीं ले बाँचे अगर
अपना अँगना में छान्ही छवावे परी
दूर तहरा से भइला पे फाटे हिया
लौट के जल्दिये तहरा आवे परी
दोस्त बनला के हमरा इहे शर्त बा
दोस्ती के फरज बस निभावे परी
राम नाथ बेख़बर
कोलकाता
