दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
धरती के हरा बनाई
कविता
फतेहचन्द 'बेचैन’
7/18/20251 min read


धरती के हरा बनाई
पौधा रोपण खूब करीं धरती के हरा बनाईं,
एक इंच भी जगह मिले वहाँ भी पौध लगाईं ।
अपनी साथे साथ भी दूसरा के प्रेरणा देईं,
पौध रोपण के मिशन बना के एके सफल बनाईं ।
महुआ, पाकड़, पीपर, बरगद, कटि के दूर भइल,
ताल, तलैया, पोखर, भीटा पटि के दूर भइल ।
भादों में अब धूरि उड़त बा चइत में पानी बरसे,
दइब कs लीला देखs तू पानी भी दूर भइल ।
धरती के दुश्मन ह प्लास्टिक ऊसर खेत बनावेला,
गल ना पावेला इ कबो तब आपन रूप देखावेला ।
खाके जानवर एकरा के दुनिया से विदा ऊ हो जाला,
इस्तेमाल अबो से रोकs कहके कहर ई ढावेला ।
धरती के दुश्मन ह प्लास्टिक ऊसर खेत बनावेला,
गल ना पावेला इ कबो तब आपन रूप देखावेला ।
खाके जानवर एकरा के दुनिया से विदा ऊ हो जाला,
इस्तेमाल अबो से रोकs कहके कहर ई ढावेला ।
पेट्रोल, डीजल क धुआँ धरती से अंबर तक छवले बा,
पर्यावरण क दुश्मन बनि दुनिया के ई भरमवले बा ।
मारत बानी पैर कुल्हाड़ी सोचs का मजबूरी बा,
आक्सीजन के होत कमी बा मानवता के सतवले बा ।
फतेहचन्द 'बेचैन’
