दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
तोर धनवा मोर धनवा एक में मिलाओ रे
बतकही
राजेश कुमार सिंह श्रेयस
2/15/20261 min read


तोर धनवा मोर धनवा एक में मिलाओ रे
जब मॉरीशस में गंगा तालाब पूज्य गंगा मां जईसन हो गइली
( मॉरीशस के हिंदी साहित्यकार श्री रामदेव धुरंधर से फ़ोन पर बातचीत )
( दुगो -दुगो परिवार, एगो संस्कृति एकही तीज त्यौहार )
भारत में विवाह संस्कार में वर और बधु दुगो पक्ष होलें l शादी के एगो रस्म जवने के हरदी धान बाँटल कहल जाला, में जब पहली बेरी दुनो पक्ष यानि दुनो परिवार मिले ले त भारतीय देसी अनाज ( धान ) अउर शुभ के चिंहा ( हल्दी ) के दुनु पक्ष अपने - अपने घर से गमछा में बांहि के ले आवेले l फिरु शुरू होला एहि रस्म के अदाएगी l
शादी करावे वाला पंडित जी दुनू पक्ष के ले आइल हरदी धान के पहिले एके में मिला देलेन आ फेरु आधा - आधा बाँट के दुनहून पक्ष के वापस फेरि देलें l
भारतीय संस्कृति में बियाह में होखे वाली ए विधि का अर्थ ह, आयीं सभे एहि पर चर्चा कइल जाय !
एहि विधि के भाव के तनि एहि लेंगे समझीं -
ई बताई, का चाहियों के ई दुनो परिवार के लोगन के ले आइल अउर आपस में मिलि चुकल हरदी - धान, के फिरू से अलगा अलगा बाँटल जा सकेला ? अपना अपना हरदी - धान के चिंही के अलगा - अलगा फरियावल जा सकेला का ?
ई त बिल्कुले ना हो सकेला l
हमरा कहले के मतलब ई बा कि अब जब दुनो परिवार आपस में मिल गइले त ई रिश्ता जन्म - जन्मांतर के हो गइल । अब एके अलगा कइल मुश्किले ना बल्कि असंभव बा l
ए बात की चर्चा हम फोन पर मॉरीशस के साहित्यकार रामदेव जी से कइली ।
अब रउआ पूछेब कि इस बात के चर्चा उहाँ से काहें कइनी ? आयीं एहु बात के समुझल जाव -
एक दिन उहाँ के यानि धुरंधर जी पूछली कि ए राजेश तोहरा हिहा शिवरात्रि कब ह ? त हम कहनी कि हमरे यहां शिवरात्रि 26 फरवरी के ह ।
त उँहा के कहनी कि हमरो हिहा मॉरीशस में शिवरात्रि 26 फरवरी के ह । देखि हम अपना घर के बहरा देखत बानी जे कइयों गो जवान लइका काँवर लेके गंगा तालाब की ओर जात बाड़े l ई सब गंगा तालाब जाई अउर उहाँ से जल लेंके शंकर जी के शिवलिंग पर चढ़ाई लोग ।
* मॉरीशस के गंगा तालाब का ह ??
रामदेव धुरंधर जी बतावे लें -
ई गंगा तालाब के शुरू में परी तालाब के नाव से जानल जात रहे l भारतीय लोग ओके परी तालाबे बोले l हमहूं कई गो किताब में ओके परी तालाबे लिखनी l बाद में भारतीय लोग ( जेकर पूर्वज भा जे खुद भारत से मॉरीशस गइल रहे ) उ भारत से गंगाजल ले आके बड़ा धार्मिक विधि विधान से परी तालाब के पानी में मिलवले लोग, अउर ओकर नाम गंगा तालाब रखि देहले l
यानी परी तालाब के जल में गंगाजल मिल गइल अउर दुनो पानी ए गने घुल मिल गइल कि मानो दुनो एक हो गइल l
अब चाहियो के दुनो पानी के एक दूसरा से अलगा कइल जा सकेला का ?
एहि कारण से मॉरीशस में अब गंगा तालाब पूज्य गंगा माई जइसन हो गईल बा l
एकर मतलब इहो भइल कि भारत आ मॉरीशस दुन्हून के संस्कृति आपस में एहि तरे मिल गईल बे कि अब उ युग युगांतर तक अलगा ना हो सकेले l
रामदेव धुरंधर जी कहिले कि हम जब जवान रहली त पैदल त ना लेकिन साइकिल से 100 से कुछुवे कम किलोमीटर घर से उ जगह होई । हमनी का जायी जा l उहां से हमनी का घरे ना लौटके, बल्कि उहां से कुछ दूर आगे एक जगह रहे त्रयोलेट, उहाँ चल जाई जा ।
ओकरे जरिये हिंदी के एगो बडका साहित्यकार अभिमन्यु अनत जी के घर रहे l त्रयोलेट में एगो शिव मंदिर बा जेके महेश्वर नाथ जी के मंदिर कहल जाला । हमनी का गंगा तालाब से जल भर के ओही शिव लिंग पर चढ़ाई जा l
राजेश कुमार सिंह श्रेयस
कवि लेखक समीक्षक
लखनऊ, उत्तर प्रदेश, भारत
बातचीत के तारीख दिनांक 22-02-2025
