दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
देवी गीत
सिंह के सवारी छोड़ि, डोलिया से अइली
देवी गीत
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देवी गीत
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सिंह के सवारी छोड़ि, डोलिया से अइली,
मईया के किरिपा अपार ।
आगे माई, डोलिया से आके मोरा अंगना उतरली,
अंगना में होखे जय जयकार ।।
नवो महरानी मिलि दुर्गा रूप धइली, असुरवृत्ति मानि जइहें हार ।
आगे माई, सत के कृपाण से असत के अन्हरिया के, खोजि - खोजि करिहें संघार ।।
दुनिया क दुरगति दूर करिहें मईया, देइ सद्बुद्धि उपहार ।
आगे माई, ज्ञान के प्रकास पूरे दुनिया में भरि दिहें , होखे नाहीं पइहें तकरार ।।
जुद्ध नाहीं होखे फइले प्रेम भाव सगरे, नाहीं घटे केहू के दुलार ।
आगे माई, धरती प रहे वाला सभे भाई - भाई हवें , टूटे ना सनेहिया के तार ।।
नवो दिन पूजा,
नवो राति जगरनवाँ, देखि हिया हुलसे हमार ।
आगे माई, जगत के माई जग तारनि मईया, सुनी 'रसराज' के पुकार ।।
शिवजी पाण्डेय रसराज
