दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

देवी गीत

सिंह के सवारी छोड़ि, डोलिया से अइली

देवी गीत

5/3/20261 min read

देवी गीत

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सिंह के सवारी छोड़ि, डोलिया से अइली,

मईया के किरिपा अपार ।

आगे माई, डोलिया से आके मोरा अंगना उतरली,

अंगना में होखे जय जयकार ।।

नवो महरानी मिलि दुर्गा रूप धइली, असुरवृत्ति मानि जइहें हार ।

आगे माई, सत के कृपाण से असत के अन्हरिया के, खोजि - खोजि करिहें संघार ।।

दुनिया क दुरगति दूर करिहें मईया, देइ सद्बुद्धि उपहार ।

आगे माई, ज्ञान के प्रकास पूरे दुनिया में भरि दिहें , होखे नाहीं पइहें तकरार ।।

जुद्ध नाहीं होखे फइले प्रेम भाव सगरे, नाहीं घटे केहू के दुलार ।

आगे माई, धरती प रहे वाला सभे भाई - भाई हवें , टूटे ना सनेहिया के तार ।।

नवो दिन पूजा,

नवो राति जगरनवाँ, देखि हिया हुलसे हमार ।

आगे माई, जगत के माई जग तारनि मईया, सुनी 'रसराज' के पुकार ।।

शिवजी पाण्डेय रसराज

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