दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

दहेज के लोभी

गीत

पुरन्जय कुमार गुप्ता "चमन देहाती"

12/20/20251 min read

दहेज के लोभी

बेची दिहले बाबू मोरा गारल कमाई

रहे फरमाईस सब दहेज में दियाईल

बाबूजी के पगरी अब कर्ज में दबाईल

तवो नाही माई हो सुघर बर किनाईल

रोज - रोज रतिया के दारू पिके आवेला,

मिलल नाही मोटर गाड़ी हमके फरमावेला

कहेला कि बाप तोऽर बड़का झपास बाऽ

देवेला ताना हमराले, नाऽ तोर औकात बा ।।

तोहरा से माई का आपन हम दुखवां बताई

सासत में कटता मोऽर जिनगी हो माई...

बिन मतलबवे हरदम करेला लड़ाई...

रोज - रोज हमरा के देवेला सजाई...

करिलें निहोरा माई, लऽ हमके बुलाई....

नाही त कहियो जियते ई अगिया लगाई ।।

दिहऽल दहेज जवन माटी में मिलवलस

बेची के गहना - गुरिया दारू में ऊड़वलस

घरवा में नून - तेल के रोज - रोज हाला बा

छोटकी ननदिया के ऐगो अलगे बहाना बा ।

करे नाही घर के कवनो, काम ऊ काज के

झुठही लगावत चले लहरा बे बात के..

सुने नाही केहू हमार दु:ख संताप के..

चमन देहाती तहरो परत नाही पाला बा

बेटी के कईसन ई जिनगी आभागा बा ।

पुरन्जय कुमार गुप्ता "चमन देहाती"