दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

का बतलाई यार बुढारी

ग़ज़ल

श्वेता राय

7/28/20251 min read

ग़ज़ल

1. का बतलाई यार बुढारी

का बतलाई यार बुढारी

कई देला बेकार बुढ़ारी ।

आँख कान सब गइल किनारे,

घुटना से लाचार बुढारी ।

दांत हेराइल स्वाद बिलाइल,

लागे जइसे भार बुढ़ारी ।

बरवा झर के उज्जर हो गइल,

का करिहें श्रृंगार बुढारी ।

इंस्टा ट्विटर जुग में जाना,

बासी बा अखबार बुढ़ारी ।

नाती नतिनी यदि हो संघे,

तब जाना गुलजार बुढारी

गऊंवा तब्बो ठीक ठाक बा,

शहर में जिउ के मार बुढ़ारी ।

राम राम कहि रोज पूछाला,

होई कइसे पार बुढारी ।

2. भोजपुरिया के सुना बखान

भोजपुरिया के सुना बखान

बोली जइसे मिठका पान ।

चौता कजरी निर्गुन पचरा,

जोगवा सोहर एकर गान ।

दादी के कुल किस्सा एम्मन,

बाबा के भी इहे जबान ।

टोला टपरी बारी कुँआ,

सब केहू तूरे एकर तान ।

लोरी में माई जब गावे,

सुत के लइका करें बिहान ।

गांव नगर से दूर देश में,

इहे करावे ला पहिचान ।

कबो न एके कतही छोड़िहा,

छोड़ बा पईबा ना मान ।

सब केहू बोलें तुहूँ बोलिहा,

भोजपुरिया के इहे गुमान

श्वेता राय

परास्नातक (जंतुविज्ञान), बी एड

बेसिक शिक्षा विभाग में विज्ञान अध्यापिका

सम्पर्क - आजाद नगर, ट्यूबेल कॉलोनी

देवरिया - 274001