दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

भोजपुरी के बराबरी भाषा दूसर करी ना

राम बहादुर राय

कविता

2/22/20261 min read

भोजपुरी के बराबरी भाषा दूसर करी ना

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भोजपुरी के बराबरी भाषा दूसर करी ना

भोजपुरिया बेकार बा भोजपुरी के बिना ।

पढ़ लिख के भोजपुरी भले केहू बोली ना

कहीं केहू अड़ी ना भोजपुरिया के बिना ।

हिन्दी में भोजपुरी बोले से काम चली ना

बढ़ी ना भोजपुरिया आगे भोजपुरी के बिना ।

पहिले वाला कवनो चिझो कहीं मिली ना

नया चिझुइया अड़ी ना पुरनका के बिना ।

फल फूल अंचार चटनी से काम चली ना

चली ना काम रोटी, भात, दाल के बिना ।

चाऊ माऊ खईला बिना जिनगी चली ना

थउस जाई देंह मोट अनाज खईला बिना ।

टिबुल, चंपाकल के पानी से काम चली ना

फसल पूरा दाना धरी ना बरखा के बिना ।

नकल कईला से ढ़ेर दिन काम चली ना

नोकरियो नीमन मिली ना पढ़ाई के बिना ।

लबजई, लुतुरई, चमचई ढ़ेर दिन चली ना

भेद कबो खुलिये जाई कुछ बतवले बिना ।

ए बबुआ लिखले से काम खाली चली ना

खेदा जइबऽ घर से कहियो कमइले बिना ।

बबुआ राम बहादुर काम तोहरो चली ना

कटि ना जिनगी तोहार भोजपुरी के बिना ।

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राम बहादुर राय

भरौली, बलिया

उत्तर प्रदेश

9102331513