दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

भिखारी ठाकुर प पहिला शोध

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भिखारी ठाकुर प पहिला शोध

3/15/20261 min read

भिखारी ठाकुर प पहिला शोध

भिखारी ठाकुर प जब जब कुछ आथेंटिक आ सबसे पहिले तरिका से सैगर काम करे के बात होई त चार लोगन के नाव सबसे पहिले लेबे के चाहीं । हम तैयब जी के भिखारी ठाकुर प शोध के पढ़त रहनी ह, त शोध के पढ़े से पहिले इ विचार आइल ह । सोचनी ह कि एह जानकारी से रउवो सभ के परिचय करा दिहीं ।

1- महेश्वराचार्य / महेश्वर प्रसाद

2- जेसी माथुर

3- रामसुहाग /रामसुभग सिंह

4- तैयब हुसैन पीड़ित

भिखारी ठाकुर प 1931 - 32 में पहिला लेख महेश्वराचार्य जी के आइल रहे आ भारत के नामी पत्र - पत्रिका में इहां के भिखारी ठाकुर के कृतित्व प लगातार लिखत रहनी । खास बात इहो बा कि भिखारी ठाकुर प सबसे पहिले दू गो किताब इहें के लिखले रहनी । एहू ले खास बात कि इहां के भिखारी ठाकुर से अक्सर मिलत रहनी । ध्यान रहे कि जवना घरी से महेश्वराचार्य जी भिखारी ठाकुर प लिखल शुरु कइले रहनी ओह घरी भिखारी ठाकुर जी के मंडली के उमिर मात्र 13 - 14 साल रहे ।

जेसी माथुर, भिखारी ठाकुर के नाट्य मंचन के आधिकारिक रुप से सरकार के ओर से पहिला प्रस्तुति इहें के करवले रहनी । इहे ना, इहां के बहुत बड़हन लेख, भिखारी ठाकुर प लिखले रहनी । 'भरतमुनि के परम्परा' के कहि के इहां के भिखारी ठाकुर के सम्बोधित कइले रहनी । इहां के भिखारी ठाकुर के आटोग्राफ लेबे के बात बड़ा विस्तार से अपना लेख में लिखले रहनी ।

भिखारी ठाकुर के पहिला साक्षत्कार लेबे वाला व्यक्ति रहनी रामसुहाग / रामसुभग सिंह जी । यानि कि सबसे पहिला आधिकारिक रुप से साक्षत्कार इहें के ले ले रहनी ।

भिखारी ठाकुर प सबसे पहिला शोध करे वाला छात्र रहनी डॉ तैयब हुसैन पीड़ित जी । सन्‌ 1981 में यानि कि भिखारी ठाकुर जी के निधन के लगभग 9-10 साल बाद, तैयब जी के शोध आइल रहे ।

एह चार गो नाव के अलावा, बहुत लोग भिखारी ठाकुर प लिखल, उहां के नाटकन के मंचन कइल जवना में अविनाश चंद्र विद्यार्थी, रघुवंश जी से ले के संजय उपाध्याय जी जइसन नाव शामिल बा । बाकिर जदि सबसे पहिले केहू के काम के चर्चा होई त उपर के चार गो नावन के चर्चा जरुर होखे के चाहीं ।

[ नोट - उपर के जानकारी, हमार निजी अध्ययन के आधार प बा, आ हो सकेला कि इ गलत होखे, जदि रउवा सभ के एह से कुछ अलग जानकारी होखे त ओह के प्रमाण सहित बतावल जाउ जवना से एह लेख में सुधार कइल जा सके । ]

नबीन कुमार

शारजाह