दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

भँवर

ग़ज़ल

मनोज भावुक

3/15/20261 min read

भँवर

भँवर में डूबियो के आदमी उबर जाला

मरे के बा तऽ ऊ दरिया किनारे मर जाला

पता ई बा कि महल ना टिके कबो अइसन

तबो त रेत प बुनियाद लोग धर जाला

जमीर चीख के सौ बार रोके - टोकेला

तबो त मन ई बेहया गुनाह कर जाला

बहुत बा लोग जे मरलो के बाद जीयत बा

बहुत बा लोग जे जियते में, यार, मर जाला

अगर जो दिल में लगन, चाह आ भरोसा बा

कसम से चाँद भी अँगना में तब उतर जाला

मनोज भावुक

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