दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

माई जइसन बड़ भउजाई

कहानी

विंध्याचल सिंह

2/15/20261 min read

माई जइसन बड़ भउजाई

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जब हमनी के बाबूजी अचकले में मरि गइलें आ हमनी चारू भाई अभी छोट - छोट रहनी जा त गाँव के लोग - बाग बतियावे लागल कि मास्टारवा के लइका टुअर हो गइलन सन | अब ऊ बिला जइहन सन | ई सुनि के एगो अजीब ढंग के डर से मन सिहरि उठे |हम अभी छोट त जरूर रहनी बाकिर एतना जरूर बुझात रहे कि बिला गइल कवनो बहुत बड़हन दुख के नांव होत होई |"

सुरेन्दर एतना बाति एकही सांसि में कहि गइलें त हमहूँ उनुकर बाति सुने बदे ओइजे आराम से बइठि गइनीं काहें कि एकरा पहिले हम ही उनसे बातिये बाति में एगो हलुका मजाक करि देले रहनीं कि का बाति बा तहरा बड़की भउजाई से बड़ा बनेला | सुरेन्दर हमके ताकत फेरु कहे लगलें -

"हमनी के बाबूजी परेमरी स्कूल में मास्टर रहनी | का जाने कवना बेमारी से ऊ एक दिन अचकले में मरि गइलें |सांच बाति त ई हो बा कि हमनी के अबही ई सब बूझे जोग उमिरियो ना रहे | ओह घरी मरला प आसरित के सरकारी नोकरी मिले के नियम ना रहे आ हमनी के कवनो दूसर सहारा ना रहे त हमनी पर दुख के पहाड़ पड़ि गइल |

टोला - मुहल्ला के लोग मोह - छोह त देखावे बाकिर कवनो मदद करे खातिर ना आवे | घर में महतारी कबो - कबो रोवत लउकि जासु त हमनी के देखि के जल्दी से लोर पोंछिके दुलार करे लागसु आ हमनी के खायका पानी में लागि जासु |

सवाल रहे कि घर के खरचा कइसे चली ? हमार बड़का भइया बारह - तेरह सालि के रहलें आ हमनी का तीनि भाई उनुका से छोट रहनी जा | भइया कहलें कि हमनी का बाबूजी के खेती करत देखले रहनीं जा, ओइसहीं मिलि - जुलि खेती करीं जा | हमनी का तीनू भाई खुशी से कहनी जा कि ईहे ठीक रही |

खेती शुरू हो गइल | चारू भाई खेत में जवने काम में एके संगे भिड़िया जाईं जा त ओहके पूरा होखे में देरी ना लागे | अजबे किसिम के ललक आ जनून रहे | पहिले सालि कुछु अनाज भइल आ हमनी के गाड़ी अब डगरे लागल रहे |

तीनिये - चारि सालि एहतरे चलल कि एगो नया काम हो गइल | हमनी के मामा बड़का भइया के बियाह नाधि दिहलें | माई के समुझा - बुझा के दिनों धरवा दिहलें आ बियाहो होइ गइल |

बियाह त ठीके होइ गइल लगले एगो समसिया सुनाये लागल | लोग काना - फूंसी करे लागल कि आरे देखिह लो, ई लइकिया ए घर में ना रही | बाति ई रहे कि भउजाई दरोगा के बेटी रहली | बड़ घर से आइल रहली | दरोगा जी कवनो दुरघटना में ना रहलें त उनकरो मजबूरी रहे ना त उनुकर बियाह शाइद हमरा घर में ना भइल रहित | ई बतिया त हमनो का जानीं जा बाकिर केहू के बतियावत सुनला प सहम जाइंजा |

घर में भउजाई माटी के चूल्हा पर लकड़ी - गोइंठा से खाएक बनावसु | बरतन धोवसु | कूंचा से घर - आंगन बहारसु | माई के खाएक परोससु | हमनी के खाएक देसु | हमनी के कपड़ो फींचि देसु | माई के कपारे तेल भी लगावसु | सभका से नीक से बोलबो करसु | आपन घर के नुकसान जियान बूझसु | हमनी के घर के आपन घर बूझसु | एइसना पर कइसे केहू उनुका के बाउर कहो |

समय बदले लागल | सरकार के कुछु नियम बदलल आ भइया के आसरित के आधार पर मास्टर के नोकरी मिलि गइल | हमनी के खुश होखे के बढ़िया मोका मिलल बाकिर ओही में फेरु केहू कहि देउ जे अब भउजाई अलगा होइ जइहें, मरद के नोकरी पर ढेर मेहरारू अलगा होइ जाली सन | ऊ हो कहिया ले चलइहन | ई सभ सुनि के जीव कुछु सहमि त जइबे करे |

भइया के तनखाह के पइसा हम तीनू भाई के पढ़ाई - लिखाई आ घरखरचा में पंजीरी लेखा छिटा जाउ | कबो- कबो त उधारो - पांइच लेबे के पड़ि जाउ | एतना पर भी भउजाई कहसु जे देवर जी लोग के पढ़ाई में कवनो कमी ढिलाई ना होखे के चाहीं |

कुछुवे दिन बाद हमरो बियाह होइ गइल | भइया -भउजाई आपन जिम्मेदारी बढ़िया निभावल | ओकरी बाद हमरो आ एगो अउरी भाई के सरकारी नोकरी लागि गइल त हमनी का खूबे मजबूत हो गइनी जा |

अबले एगो बाति बुझा गइल रहे कि केहू के बाति से डेरइला के काम नइखे | आपना काम में लागल रहल ठीक बा | अब त हमनी का मिलिके गाँव में कई बिगहा खेत भी कीनि लिहनी जा | दुई गो टेकटर किना गइल | गाड़ी किना गइल | अब हमनी सब गाँव के बरियार परिवार गिनाईं जा | घर - दुआर, रुपया - पइसा, खेत - बारी, सवांगी सबकुछ रहे हमनी के पास |

एह बीच हमनी के एकही बाति खटके कि एगो मझिला भाई केतनो कोशिश कइके हारि गइनीं जा बाकिर पढ़लन ना | कवनो उपाइये ना लागे उनका पर | बियाह त उनुको भइल बाकिर हमनी के उनुका के लेके चिन्ता ना कम भइल |

एहू के हल - भल भउजाइये निकालि दिहली | ऊ सभका सोझा कहली कि जेतना खेत बा ऊ सब ऊहे खेती करिहें | ऊहे अनाज बेचिहें आ पइसा अपना लगे धरिहें | तीनों नोकरिहा लोग उनुका बेटा - बेटी के ओइसहीं मिलि के पढ़ाई जइसे अपना लइकन के पढ़ाई | उनुका बेटा - बेटी के बियाह में सभ मिलिके खरचा देई आ सबके बरोबर वाली शादी कइल जाई |मम्मी जी के जियता समय ले केहू खेती - बारी बांटे के बाति ना करी | घर - परिवार के बान्हि के राखे वाली एतना बढ़िया बाति के ना मानी ? भउजाई के बाति हम सब भाई खुशी - खुशी मानि लिहनी जा आ ओहितरे हमनी के परिवार आजुवो चलि रहल बा |

आजु हमनी के चारू भाई के लइका - फइका मिलिके बहुते बड़हन परिवार होइ गइल बा आ सभे खुशी से रहि रहल बा | हमनी के कवनो काम कबो रुकेला ना | हमनी के चारू भाई आपस में पूछत रहेनी जा कि कुछु जरूरत होइ त बतइह | ई सभ हमनी का भउजाइये से सीखले बानी जा |

हमार आपन माई अबहियो बाड़ी | ऊ सइ नियरवले बाड़ी | सब मिलिके उनुकर सेवा करेला | उनुकर हमनी पर आशीर्वाद बा बाकिर बड़की भउजाई जो हमनी के घरे ना आइल रहिती त हमके बुझाला कि हमनी का अबले कहीं छिटा गइल रहितीं जा |"

अन्तिम बाति कहत में सुरेन्दर के आंखि लोरा गइल रहली सन | हमहुँ उनुका बातिन में खोइ गइल रहनी | हम हाथ के हथेली तनी ऊपर उठाके उनुके चुप करावे चहलीं | सुरेन्दर चुप त होइ गइलें लेकिन भरभराइल आवाज में हमरी ओर ताकि के पूछि लिहलें-

"आपे बताईं एइसन भउजाई के का कहल जाई ?"

हमरा मुह से झट से निकलि गइल -

"माई जइसन बड़ भउजाई"

विंध्याचल सिंह

बुढ़ऊं, बलिया, उत्तर प्रदेश

9838418288