दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
भाषा, सभ्यता
बधाई संदेश
माधव कृष्ण
11/8/20251 min read


भाषा, सभ्यता
भाषा के अपमान सभ्यता के अपमान बा । भाषा के क्षरण संस्कृति के क्षरण बा । जे ई बात कहे ला कि भाषा बदे शोर मचउला का जरूरत नइखे, ऊ ई बतिया भुला जाला कि भाषा अपने साथ का का लेके आवेले अउर ई भाषा जब जाई त कुल लेके चल जाई ।
आज भोजपुरी जनपद में लोकजीवन के नष्ट होवे क खतरा मंडरा रहल बा । पर्व आ दैनिक जीवन के उल्लास शराब आ जुआ में बदलत जात बा । औरत लोगन के सम्मान खतम होत बा, आ लोकलाज त देखाते नइखे ।
सादगी, सरलता, समृद्ध लोकजीवन, संस्कृति, कोमलता, मधुरता ई कुल भोजपुरी भाषा के विशेषता बा । जब ले भोजपुरी बोले में लोगन के लाज ना लागी, तब तक भोजपुरी जनपद में ई कुल विशेषता बनल रहे ।
समाज आ संस्कृति के बचावे खातिर भाषा के बचावल जरूरी बा । आज धन आ पूजी के युग में ई सबका बस के बात नइखे । भाषा जइसन चीज के बचावे खातिर बड़ा धीरज, मिशनरी भाव आ संकल्प चाही ।
कबीरा खड़ा बाजार में, लिए लुकाटी हाथ ।
जो घर फूंके आपनौ, सो चले हमारे साथ ।
ए होम में हाथों जरेला आ करेजा भी । लेकिन दीया बाती क टीम आ हमहन के बड़ बुजुर्ग साहित्यकार राजेंद्र भारती जी ई बीड़ा उठउले बानी ।
दीया बाती के माध्यम से नया नया साहित्यकार लोगन के ऑनलाइन पढ़ला के मौका मिल जात बा । एकरा नया अंक बदे अनघा बधाई आ शुभकामना । अइसही ई पत्रिका हमहन में भोजपुरी खातिर गौरव बोध उत्पन्न करे, आ सब के भोजपुरी में लिखे पढ़े आ बोले बदे प्रेरित करे, ईहे हमार भगवान से प्रार्थना बा ।
माधव कृष्ण
साहित्यकार
प्रबंधक
पी आई एस स्कूल, गाज़ीपुर
070071 15974




