दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

भाषा भोजपुरिया

कविता

विनोद कुमार "विमल"

7/21/20251 min read

भाषा भोजपुरिया

1. कुहुके ली

कुहुके ली

भाषा भोजपुरिया हो ।

गतरिया में लाज नाही तनिको

बेची खईलS

भाषा के गठरिया हो,

गतरिया में लाज नाही तनिको !!१

गाई, बजाई खूब

कमईब तू पइसा,

चलब उतान कहब,

के बा हमरा जईसा,

अईठे लS

जरल जस रसरिया हो

गतरिया में लाज नाही तनिको !!२

कुहुके ली

भाषा भोजपुरिया हो ।

गतरिया में लाज नाही तनिको

ताल सुर धुन का हS

कबों ना ही जनलS

भाषा भोजपुरी का हS

भाव ना ही मनलS

भुलि गईलS

"विमल" शब्द अच्छरिया हो,

गतरिया में लाज नाही तनिको !!३

कुहुके ली

भाषा भोजपुरिया हो ।

गतरिया में लाज नाही तनिको

निक जबून का हS,

तनिका विचारS

भाखा मर्यादा के तू,

तानिका सम्हारS

झांक तनी

"विनोद" भीतरिया हो,

गतरिया में लाज नाही तनिको !!४

कुहुके ली

भाषा भोजपुरिया हो ।

गतरिया में लाज नाही तनिको.

2. हहरत हियरा में, केहू हच से समाई जाला

हहरत हियरा में,

केहू हच से समाई जाला

जिनिगी के उकठल बगिया,

हरियराई जाला ।

पुछि लेबि,

प्रेम में पियासल,

कवनों प्रेमपथिक से ।

सचहूं ! तब,

मन गदगद हो जाला,

हीयरा आघाई जाला ।

पपिहा के प्यास त,

स्वाति के बूंदे से नू बुझी ।

जवना के पियते,

पपिहा के करेजा जुड़ाई जाला ।

हहरत हियरा में,

केहू हच से समाई जाला

जिनिगी के उकठल बगिया,

हरियराई जाला ।

पूछि लेबि,

कबो कुहुकत कलियन से,

जहां भंवरा मड़राई जाला ।

सचहूं ! तब,

कलियन रंगत खिल जाला,

आ ऊ कली गदराई जाला ।

हहरत हियरा में,

केहू हच से समाई जाला

जिनिगी के उकठल बगिया,

हरियराई जा

3. घरवाली आ बाहरवाली में भेद !

घरवाली मधुमक्खी होखसू

मारसु हरदम टूंड ।

फिर भी ऊ मधुएँ बरसावसू

उनसे मत, भागि दूर ।

लड़िहे-झगड़िये तबो दुलरिहें

ममिला समझि भरपूर ।

दुर्दिन में कामें ऊ अइहें

तब कहिहै, सुनि ! हजूर ।

मत बिसराईब चित्त से उनके

कब्बो, करबि ना दिल से दूर ।

हँसि ! पघिलाई ! मन बहलाई !

उनके ! समुझि ई बात जरूर ।

बाहरबाली तितली भर होली

केतना ऊ मगरूर ।

रस चुसल भर काम हs उनकर

फेरू उड़ जाली ऊ फुर्र ।

चार दिन के चननि, भर होली

ऊ कहे ली खुद के हूर ।

काम निकलते लातों मरिहै

करिहै हटs तू दूर ।

भेद समझ ली आपन-दूसर कs

'विमल' बनी ना हजूर ।

हास-विनोद के बात अलग हs

रहि एह तितलिन से मुड़ ।।

4. चलत काम भगवान भरोसे

घूमि घूमि के देखि लs भइया

परल होस बाटे मद होसे ।

चलत काम भगवान भरोसे ।।

जाने कइसन ई आजादी

खउरा खपटन के बा चाँदी

के रोकी कइसे बरबादी

नवका देखऽ चलन चलल बा

दागी संगवा ले ले पोसे ।

चलत काम भगवान भरोसे ।।

सभे लुहेंड़ा आगे भइलन

पा जोगाड़ जगहा पर गइलन

बहती गंगा छउकी नहइलन

सामिल बाजा बाजि रहल बा

मारि खात खाली निरदोसे ।

चलत काम भगवान भरोसे ।।

गलते पोसल ढोवल जाता

झूठ मूठ के रोवल जाता

जवनो बाँचल खोवल जाता

हहरा ढूकल बा सगरे अब

रिस्वत ले ले खूब भकोसे ।

चलत काम भगवान भरोसे ।।

पाठ पढ़ाई में ना दम बा

कवन विभाग कवना से कम बा

सबमें बइठल ढींठ अहम बा

जोगवल सपना टूटि रहल तऽ

दसा देखि के मन मसोसे ।

चलत काम भगवान भरोसे ।।

विनोद कुमार 'विमल'

भारतीय सेना में कार्यरत