दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
भोजपुरी लोक आ बाजारवाद
तनिका रहिहऽ दूर तू, नाशे लोक बजार
कनक किशोर
5/3/20261 min read


भोजपुरी लोक आ बाजारवाद
तनिका रहिहऽ दूर तू, नाशे लोक बजार ।
भोजपुरी हऽ लोक के, सीखऽ लोकाचार ।।
पछेया हवा बयार के, होता सगरो पूछ ।
जनिया नाचे दुआर प, मरद आज बिनु मूंछ ।।
परंपरा के नांव पर, गावे गारी गीत ।
ससुर ठुमके बहू संग, बबुआ कइसन रीत ।।
खेत बेचि बइठल शहर, बाप मतारी गांव ।
बाबू घूमे माॅल में, तनिक न भावे गांव ।।
पढ़ल लिखल ऊ छोड़ के, गइले घर से दूर ।
चाहत दिल में एक रहे, शहर करी मशहूर ।।
माटी कहे पुकार के, जा जनि बबुआ दूर ।
शहर बना रखी तोहे, घर अपना मजदूर ।।
खड़ा गेट पर सेठ के, पगड़ी माथे तोर ।
संतरी बनल देखि के, बाबा आंखिन लोर ।।
बरगद, महुआ, आम सब गायब खेत बधार ।
जिनिगी धुआं - धुआं भइल, टूटल घर परिवार ।।
रील बनावे के चक्कर, संउसे घर बा लीन ।
ना बांची कुछ लोक के, घर आ बइठी चीन ।।
मंच मिलल किशोर हाथ, गइले अपने गीत ।
बनल बाड़े ऊ आज त, आपन बड़का मीत ।।
देखऽ हाल किशोर के, गावस अपने गीत ।
बइठ बाजार बीच में, भूल गइल सब रीत ।।
कनक किशोर
चलभाष - 9279200401
