दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

छठ परब के महातम

निबन्ध

आरती पाण्डेय

12/7/20251 min read

छठ परब के महातम

भारतीय संस्कृति में प्रचलित कवनों भी पर्व - त्योहार खाली धार्मिक अनुष्ठान भर ही ना ह, बल्कि ओह में जीवन के गहिर मूल्य आ दर्शन छिपल होखेला । छठ पर्व भी एह परंपरा के एगो अद्भुत उदाहरण ह । ई पर्व खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश आ झारखंड में बहुते ही आस्था ,विश्वास, शुद्धता आ पवित्र मन से मनावल जाला । अब त एह परब के देशभर सहित विदेश में भी बहुते प्रचार - प्रसार भइल बा । दुनिया भर के लोग अपना सामर्थ्य और श्रद्धा के हिसाब से एह पर्व के मना रहल बाड़े । बिहार आ उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक पहिचान आ लोक आस्था के सभसे बड़का पर्व छठ अब अंतरराष्ट्रीय मंच प आपन पहिचान दर्ज करावे के भी तैयारी में बा । कला, संस्कृति आ युवा विभाग छठ के यूनेस्को के अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल करावे के दिशा में प्रयासरत बा ।

छठ सबले पवित्र आ कठोर व्रत हवे । ई सूरज भगवान आ छठी मइया के पूजा हवे । मानल जाला कि सूरज देवता से जीवन में उर्जा, आरोग्यता आ सुख - समृद्धि मिलेला । छठी मइया संतान सुख आ घर - परिवार के रक्षा करेली । लोक में इ आस्था आ विश्वास बा की जे मन से छठी मइया के व्रत करेला, ओकरा सब मनोकामना पूरा होला । छठी मइया ओकर हर मुराद पूरी करेली ।

छठ चार दिन तक चले वाला अदभुत परब ह । व्रती लोग चार दिन तक शुद्धता से उपवास आ अनेक विधि विधान करेला । ई पर्व में मन, वचन आ तन के पवित्रता बहुत जरूरी होला । चार दिन तक चले वाला एह पर्व में पहिला दिन – नहाय - खाय कहल जाला । गंगा नहाई के घर के साफ - सफाई होला । व्रती लोग शुद्ध भोजन (कद्दू-भात, दाल) खाईला । दूसरका दिन के – खरना कहल जाला ।

दिनभर उपवास क के सांझे व्रती गुड़ - खीर, घी लगल रोटी आ फल के पारण करेला । ओकरा बाद परिवार - पड़ोस में भी प्रसाद बंटेला । तीसरका दिन – संध्या अर्घ्य होला । व्रती नदी - तालाब किनारे जाके डूबत सूरज के अर्घ दिहेला । सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, नारियल सजावल जाला । छठी माई आ सुरुज देव के गीत - भजन गावल जाला । चउथा दिन – भोर में अर्घ्य दियाला । भिनसारे उगते सूरज के अर्घ दिहल जाला । ई सबसे पवित्र घड़ी होला । अर्घ के बाद व्रत के पारण क के प्रसाद बाटल जाला ।

इ पर्व में कवनो भी पंडित आ पुजारी के ज़रूरत ना होला , हर व्रती आपन श्रद्धा से पूजा करेला । ठेकुआ छठ के प्रमुख प्रसाद हवे । पूरा गाँव - मोहल्ला मिलके घाट पर इकट्ठे पूजा करेला । ई परब सामूहिकता, सामाजिक एकजुटता के अद्भुत प्रतीक हवे ।

छठ पर्व प्रकृति आ मानव के मेल के पर्व हवे । ई पर्व प्रकृति के प्रति, आस्था, श्रद्धा, प्रेम, लगाव आ आभार प्रकट करे के पर्व ह । सूरज, जल, वायु आ धरती – जेकरा बिना जीवन संभव नइखे – ओकरा के प्रणाम करे, आदर देवे आ आभार करे के पर्व हवे । छठ ना सिर्फ पूजा - पाठ बलुक अनुशासन, शुद्धता, आस्था, आ पर्यावरण बचावे ओके स्वच्छ बनाए रखे के पर्व हवे । ई पर्व में लोग नदी - तालाब, गंगा घाट के साफ - सफाई करेला, घाट सजावेला, जेकरा से पर्यावरण के रक्षा होला। डूबते आ उगते सूरज के अर्घ देके मनुष्य जीवन के लय आ प्रकृति के चक्र के प्रति विश्वास प्रकट करेला । छठी मइया आ सूरज देवता से प्रार्थना कइल जाला कि सभे के जीवन में सुख, शांति आ समृद्धि आवे ।

उगत सूरज के त सगरी दुनिया प्रणाम करेला, बाकिर डूबत सूरज के प्रणाम करे के छठी मइया के परब ही सिखवले बा । इ परब सिखवेला कि जीवन के ढलान, कठिनाई आ हार के भी आदर कइल चाहीं । जेकरा से रउरा लाभ मिलल, ओकरा विदाई के घड़ी में “धन्यवाद” कहला से बड़का जीवन मूल्य कुछ ना बा । इ परब जीवन में कृतज्ञता, स्वीकार्यता आ विनम्रता के मूल्य सीखवेला ।

छठ पर्व अद्वितीय बा काहे कि एह में डूबत सूरज के भी अर्घ्य देवल जाला । एह में बहुत गहिर संदेश छिपल बा कि सम्मान ओकरा के भी देवे के चाहीं जे आपन योगदान दे चुकल बा । सूरज दिन भर प्रकाश आ उर्जा देवेला, त ओकरा विदा होते घड़ी भी कृतज्ञता जतावे के चाहीं । जीवन में ढलान, हार आ बुढ़ापा के भी मान - सम्मान दीहल चाहीं । ई छठ पर्व मनुष्य के सिखवेला कि खाली सफलता (उगत सुरुज) के ना, बलुक संघर्ष आ ढलान (डूबत सुरुज) के भी आदर करल जरूरी बा ।

भोर में उगते सूरज के प्रणाम आ अर्घ्य जीवन में आशा, उमंग आ नवा अवसर के प्रतीक हवे । रात अंधियार आ कठिनाई के बाद नया दिन जरूर आवेला । छठ एह विश्वास के मजबूत करेला कि जीवन चाहे जतना कठिन होखे, उगता सूरज नियन नवा मौका जरूर मिलेला ।

इ परब जीवन में आशा, संघर्ष शक्ति, नवा शुरुआत के उमंग के संदेश देला । जीवन में अगर ढलान बा त उगान भी बा । सांझा आ प्रभाती के सूर्य पूजन और अर्घ्य जीवन में आभार, धैर्य, आशा आ संतुलन के अद्भुत प्रतीक ह ।

जीवन में कृतज्ञता, धैर्य, आशा, संतुलन, अनुशासन, शुद्धता, पवित्रता आ सामूहिकता के पाठ पढ़ावे वाला इ पावन पर्व सबके जीवन में खुशहाली , समृद्धि आ शांति लावे एह आशा और विश्वास के साथ छठ पर्व के अनघा बधाई ।

आरती पाण्डेय

शोधार्थी (हिंदी साहित्य)

जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया