दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )

आपन संस्कृति, आपन विरासत

गोवर्धन पूजा अऊर भइया दूज

अर्चना श्रीवास्तव

12/7/20251 min read

आपन संस्कृति, आपन विरासत

गोवर्धन पूजा अऊर भइया दूज

हमनी के परम्परा, हमनी के संस्कृति अऊर त्योहार अपना भीतरी एगो नवका संचार के अनुभूति करावेला ।

प्रेम अऊर सौहार्द के संदेश देला एकरे वजह से हमनी के एक दूसरा से जुड़ल रहेनीजा अऊरी याद करेनी जा ।

गोवर्धन पूजा दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा तिथि के मनावल जाला । ऐही दिने गोवर्धन अऊर भगवान श्री कृष्ण के पूजा कइल जाला । अऊरी एकरा के अन्नकूट के परब के रूप में भी मनावल जाला ।

भाई दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष के द्वितीया तिथि के मनावल जाला, यानि गोवर्धन पूजा के अगिला दिने ।

भाई - बहिन के पवित्र रिश्ता के समर्पित ई त्योहार ह । बहिन लोग आपन - आपन भाई के तिलक लगावेली अऊरी उनकर सुखी आ लंबा जीवन के प्रार्थना करेली ।

एकरा के भैयादूज, भाऊबीज, भातृद्वितीया के नाम से भी जानल जाला ।

पौराणिक कथा के अनुसार देवराज इन्द्र अंहकार में ब्रजवासियन पर मूसलाधार बरखा क के कहर बरपावत रहलन । भगवान श्री कृष्ण इन्द्र के ई क्रोध से ब्रजवासियन अउरी पशुअन के रक्षा करेके खातिर गोवर्धन पहाड़ के आपन तर्जनी अंगुरी पर उठाके ओकरा नीचे सबका के शरण देके इन्द्र के प्रकोप से सुरक्षित क देहलन ।

इहे घटना से ब्रजवासियन के प्रकृति के महत्ता के एहसास भइल अऊरी ऊंहा के सब लोग गोवर्धन पहाड़ के पूजा करे लगले ।

एही दिने कई तरह के अन्न से भगवान के भोग लगावल जाला अऊरी कृष्ण अऊर गोवर्धन पहाड़ के आसपास परिक्रमा कइल जाला । अऊरी जवन लोग गोवर्धन के पास ना पहुंच पावेलन उ लोग गाय माता के पूजा कर लेलन गोवर्धन के रूप मानके ।

ई त्योहार प्रकृति के प्रति कृतज्ञता के भी प्रतीक हवे ।

भइया दूज मनावे के पीछे भी एगो पौराणिक कथा कहल जाला सूर्य देव के पत्नी छाया के पुत्र यमराज अऊर पुत्री यमुना हवें । यमराज आपन बहिन यमुना से बहुत स्नेह करत रहलन । यमुना आपन भाई यमराज के कई बार अपना घरे आवे के नेवता देत रहली, लेकिन उ आपन काम में व्यस्त होखे के कारन ना आवत रहलन, आखिर कार्तिक महिना के शुक्ल पक्ष के द्वितीया तिथि के दिन यमराज आपन बहिन यमुना के घरे गइलन, यमुना आपन भाई के आपन घर में आइल देख के बहुत खुश भइली, उ आपन भाई के खुब आदर सत्कार कइली । उनका पसंद के भोजन करइली अऊरी तिलक लगाके उनका खुशहाली के कामना कइली ।

यमुना के ई सत्कार से यमराज बहुत प्रसन्न भइलन अऊरी यमुना से वर मांगे के कहलन । यमुना, यमराज से कहली की उ हर साल ई शुभ तिथि पर उनका घरे अइहन अऊरी भोजन करिहन अऊर उ ई वरदान देस की जवन भाई आपन बहिन के घरे आके तिलक लगवइन उनकर अकाल मृत्यु के भय ना रही ।

यमराज, यमुना के बात मान लिहलन अऊरी उनका के आशीष देहलन तबे से भाई - दूज के परब मनावे के प्रचलन शुरू भइल, जवना के यमद्वितीया भी कहल जाला ।

आजो गोवर्धन पूजा अऊर भाई दूज के पर्व हर साल बहुत धूमधाम से मनावल जाला काहें कि हमनी के अपना संस्कृति के आपन दिल में बसाके रखेनीजा अऊरी बहुते श्रद्धा से मनावेली जा ।

अर्चना श्रीवास्तव

नोएडा-सेक्टर 70