दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
बात दिल के
मन के भीतर अन्हरिया बा छाइल
मोहन जी 'सत्यांश'
7/12/20251 min read


बात दिल के
बात दिल के कहाँ ओराइल बा
का कहीं, का कहीं हेराइल बा
जब भी अइलs तु आँखि के सोझा
दिल दिमागो त थमथमाइल बा
प्यार के राह हम त चल दिहनी
केतना मुश्किल बा इ बुझाइल बा
कबो अचके में फेरु आ जइतs
मान लेंती कि सब कहाइल बा
दिल के दुनिया आबाद हो जाइत
दर्द निकसित जवन समाइल बा
आस विश्वास प्रेम पथि 'मोहन'
नेह के डोर संग बन्हाइल बा
मन के भीतर अन्हरिया बा छाइल जवन
डगमगाई डेराई फेर छॅऺंटबे करी
बनिके बरखा के बुनी बहि आँखि से
इ करिया बदरिया त हटबे करी
डटिके रहिहs आवे केतनो आन्हि बयार
नीक बाउर समइया त सटबे करी
दिन ना रहे कबो एक लेखा ' मोहन'
नेह वाली किरीनिया त फुटबे करी
मोहन जी सत्यांश
संचालक -सत्यांश उपक्रम प्राइवेट लिमिटेड
अध्यक्ष - ट्रू आईज फाउन्डेशन
प्रबंधक - श्री दयालु बाबा सत्य नयन इंटरमीडिएट कॉलेज
