दीया बाती ( भोजपुरी, तिमाही, ई - पत्रिका )
तब जानबि
नवगीत
रामरक्षा मिश्र 'विमल'
7/23/20251 min read


नवगीत
1. तब जानबि
ओठे पपरी
लाख दिलासा
खाइबि तब जानबि ।
एको कवर गइल सुबहित ना
मन पँवरे सगरी
राह कठिन ओठन पर मुसकी
माथ भरल गगरी ।
कइसन कजरी
कइसन फगुआ
गाइबि तब जानबि ।
पानी नियन बहल पइसा
बबुआ मन से पढ़ले
माई बाबू संग मन में
दुनिया नवकी गढ़ले ।
गरदन फँसरी
तेज दउड़ बा
जाइबि तब जानबि ।
समता का मकुनी में सुंदर
बइमानी पूरन
हरिआए मन छिरकइला पर
जिनिगी के चूरन ।
बरिसे बदरी
चानी सोना
पाइबि तब जानबि ।
2. ना होखे बरदाश
ना होखे बरदाश
करे छटपट मन
गीत बनल ।
बिजली के तेजी मचले
ना डेग रहे धरती
हरियाए लागे चिंतन के
मरुआइल परती
सम्मत जरते
ताल ठोकाइल
हिरदे प्रीत भरल ।
समहुत के सपना टूटल
अँधियारा मन में अब
प्रभुता के धरती सिकुरल
जिनिगी खुद से गायब
पँवरे अब बिसवास
सनेहिया तक
पानी पइसल ।
डॉ. रामरक्षा मिश्र 'विमल'
निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, पिपरा
देवनगर, पोल नं. 28, पिपरा रोड,
पो. - मनोहरपुर, कछुआरा
पटना - 800030
सचल दूरभाष - 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail.com
